बाईपास का निर्माण ही उपयुक्त विकल्प-डाॅ.कल्ला
खुलासा न्यूज़, बीकानेर।
 शहर की ज्वलंत रेल्वे फाटकों की समस्या के समाधान के लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी  और ऊर्जा मंत्री डाॅ. बी.डी.कल्ला की अध्यक्षता में गुरूवार को कलैक्ट्रेट सभागार में रेल्वे और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में व्यापक विचार-विमर्श किया गया। बैठक में शहर में रेल्वे ट्रैक और फाटकों की समस्या से निपटने के लिए बाईपास सहित अन्य विकल्पों पर गुणदोष के आधार पर चर्चा की गई। डाॅ.कल्ला ने कहा कि रेल्वे की विस्तार योजना में रेल्वे ट्रैक का विद्युतीकरण और डबल ट्रैक प्रस्तावित है। ऐसी स्थिति में शहर से गुजरने वाला रेल्वे ट्रैक कत्तई उपयुक्त नहीं है। इस ट्रैक के आसपास की बस्तियों के मकानों को खतरा होने से जन-धन की हानि हो सकती है। रेल्वे फाटकों के कारण शहर का आमजन यातायात को लेकर भी लम्बे समय से पीड़ित है। अतः हमें मिल-जुलकर इसके समाधान के लिए प्रयास करने की जरूरत है।

डाॅ. कल्ला ने कहा कि बीकानेर संभाग में राष्ट्रीय राजमार्ग पर रेल्वे फाटकों की समस्या का भी समधान करने के लिए भी पुख़्ता उपाय किए जाएं। डाॅ. कल्ला ने कहा कि शहर के रेल्वे फाटकों की समस्या को लेकर एक लम्बे समय से विकल्पों पर विचार ही होता रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत पर कोई भी कार्यवाही नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्व में स्वीकृत एलीवेटेड रोड को लेकर सर्वे के बाद बजट के आवंटन के बावजूद तत्कालीन सरकार द्वारा रेल्वे के साथ एमओयू नहीं किए जाने के कारण यह कार्य शुरू नहीं हो सका। रेल्वे बाईपास के 26.5 किलोमीटर मार्ग पर लालगढ़ से नाल तक रेल्वे ट्रैक भी बन गया है, लेकिन शेष 14.5 किलोमीटर  नाल से गाढ़वाला तक का कार्य हो जाने से बाईपास का कार्य पूर्ण हो सकता है।  उन्होंने कहा कि रेल्वे के अधिकारियों को आगे बढ़कर इसके समाधान के लिए सक्रिय होना होगा।

डाॅ. कल्ला ने कहा कि रेल्वे भी बाईपास बनाए जाने के विकल्प पर सहमत है। उन्होंने बताया कि बैठक में बाईपास, एलीवेटेड रोड अथवा रेल्वे टनल जैसे प्रस्तावों के उपरान्त प्राप्त सर्वे रिपोर्ट के आधार पर आगे बैठक का आयोजन कर निर्णय लिया जाएगा।

दो अण्डरब्रिज का होगा निर्माण

ऊर्जा और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री डाॅ. कल्ला ने बताया कि रानी बाजार रेल्वे क्राॅसिंग और लालगढ़ गुरूद्वारे के पास दो अण्डरब्रिज का निर्माण शीघ्र प्रारम्भ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रानीबाजार अण्डरब्रिज पर 5 करोड़ 50 लाख रूपये  खर्च होंगे, वहीं लालगढ़ के पास बनने वाले अण्डरब्रिज पर 3 करोड़ 40 लाख रूपये व्यय होंगे। उन्होंने बताया कि दोनों ब्रिज पर होने वाले व्यय नगर विकास न्यास द्वारा वहन किया जाएगा।

बीकानेर से नागौर के मध्य रेल्वे फाटकों की समस्या से शीघ्र निजात मिलेगी

डाॅ. कल्ला ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के तहत बीकानेर से नागौर तक रास्त में आने वाले 5 रेल्वे फाटकों की समस्या की भी समाधान शीघ्र किए जाने के लिए भारत सरकार स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। यहाँ ब्रिज बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर पूर्व मंे भेजे गए थे, मगर किन्हीं कारणों से प्रस्तावों को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। पूरे प्रकरण को राज्य सरकार के माध्यम से भारत सरकार को प्रेषित कर इसका फाॅलोअप किया जाएगा, ताकि बीकानेर से नागौर तक सड़क यातायात और बेहतर हो सके। इसके लिए  राष्ट्रीय राजमार्ग के एक अधिकारी को पृथक से लगाया जाएगा, जो कि संपूर्ण काजगात सहित भारत सरकार और राज्य सरकार के बीच समन्वय का कार्य करेंगे।

बाईपास एक मात्र विकल्प

बैठक में डाॅ. कल्ला ने कहा कि जैसे-जैसे शहर का विकास हो रहा है, उसे देखते हुए जल्द ही बीकानेर में भी रेल्वे नियमों के तहत विद्युतीकृत ट्रैक से पूरा देश जुड़ रहा है और बीकानेर में भी आने वाले वर्षों में विद्युतीकृत टैªक की स्थापना होनी है और विद्युतीकृत ट्रैक के मानदण्डों के अनुसार डबल ट्रैक अनिवार्य होता है। वर्तमान में शहर के बीच से गुजरने वाली रेल्वे लाईन मंे इतना स्थान नहीं है कि वहां डबल ट्रैक की स्थापना हो सके। हमें भविष्य के विकास को सोचते हुए बाईपास पर पूरी गंभीरता के साथ कार्य करना प्रारंभ कर देना चाहिए। रेल्वे विभाग मानसिक रूप से यह तय कर ले कि उसे केवल बाईपास की संभावनाएं तलाशते हुए इस पर ही कार्य करना है।

जिला प्रशासन करवाएगा भूमि उपलब्ध

जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने कहा कि बाईपास के लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन द्वारा पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा। बाईपास के लिए जितनी भूमि की जरूरत है, वह जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध करवा दी जाएगी। साथ ही अन्य सभी सकारात्मक सहयोग जनहित को ध्यान में रखते हुए दिया जाएगा। बैठक में रेल मण्डल प्रबंधक एस.के.श्रीवास्तव, नगर निगम आयुक्त डाॅ.प्रदीप के. गंवाड ेसहित एन.एच.ए.आई., आर.एस.आर.डी.सी. सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। बैठक के दौरान विभिन्न संगठनों ने रेल बाईपास से जुड़े विभिन्न विकल्पों पर अपना प्रजेन्टेशन रखा।