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जयपुर। पिछले 82 दिन से शाहजहांपुर खेड़ा बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के तहत अब किसान अपनी मांगों के समर्थन में 6 मार्च को दिल्ली बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। इस दिन दिल्ली व दिल्ली बॉर्डर के विभिन्न विरोध स्थलों को जोडऩे वाले केएमपी एक्सप्रेस वे पर 5 घंटे की नाकाबंदी की जाएगी। यहां सुबह 11 से शाम 4 बजे के बीच जाम किया जाएगा। यहां टोल प्लाजा  को टोल फ्री किया जाएगा। शेष भारत में, आंदोलन के समर्थन में और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए घरों और कार्यालयों पर काले झंडे लहराए जाएंगे। संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रदर्शनकारियों को कल काली पट्टी बांधने के लिए भी आह्वान किया है।
मोर्चा मनाएगा महिला किसान दिवस
8 मार्च को संयुक्त किसान मोर्चा महिला किसान दिवस के रूप में मनाएगा। देश भर के सभी सयुंक्त किसान मोर्चे के धरने महिलाएं ही संचालित करेंगी। इस दिन महिलाएं ही मंच प्रबंधन करेंगी और वक्ता होंगी। एसकेएम ने महिला संगठनों और अन्य लोगों को आमंत्रित किया कि वे किसान आंदोलन के समर्थन में इस तरह के कार्यक्रम करें और देश में महिला किसानों के योगदान को उजागर करें।
ट्रेड यूनियन के समर्थन में किसान मोर्चा
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर 15 मार्च को निजीकरण विरोधी दिवस का समर्थन करते हुए सयुंक्त किसान मोर्चा की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। एसकेएम इस दिन को कॉरपोरेट विरोधी दिवस के रूप में देखते हुए ट्रेड यूनियनों के इस आह्वान का समर्थन करेगा और एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। जिन राज्यों में अभी चुनाव होने वाले हैं, उन राज्यों में एसकेएम भाजपा की किसान विरोधी, गरीब विरोधी नीतियों को दंडित करने के लिए जनता को एक अपील करेगा। एसकेएम के प्रतिनिधि भी इस उद्देश्य के लिए इन राज्यों का दौरा करेंगे और विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
एमएसपी दिलाओ अभियान होगा शुरू
एसकेएम पूरे भारत में एक एमएसपी दिलाओ अभियान शुरू करेगा। अभियान के तहत, विभिन्न बाजारों में किसानों की फसलों की कीमत की वास्तविकता को दिखाया जाएगा, जो मोदी सरकार और एमएसपी के झूठे दावों और वादों को उजागर करेगा। यह अभियान दक्षिण भारतीय राज्यों कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में शुरू किया जाएगा। पूरे देश में किसानों को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा।
23 मार्च को जयपुर में होगी महापंचायत
इतना ही नहीं आगामी 23 मार्च को राजधानी जयपुर में किसान महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। इससे पूर्व 17 मार्च को श्रीगंगानगर और संगरिया में किसान महापंचायत होंगी। कामरेड अमराराम, राजराम मील, तारा सिंह सिद्धू और डॉ. संजय माधव ने कहा कि यह आंदोलन अब इन तीन कानूनों से आगे बढ़ चुका है। अब यह आंदोलन किसानों के अस्तित्व और इज्जत का आंदोलन बन चुका है। किसान नेताओं का कहना था कि केंद्र की भाजपा.आरएसएस की मोदी सरकार की हठधर्मिता, क्रूर दमनकारी नीतियों, तरह.तरह से झूठ भ्रम फैला कर आंदोलन को बदनाम करने की तमाम चालों और कोशिशों के बावजूद किसान.आंदोलन ने देश के किसानों और आम जनता के बीच अपनी जड़े गहरी जमा ली हैं। प्रदेश में करीब दो दर्जन किसान महापंचायत हो चुकी हैं, जिनमें रायसिंह नगर, हनुमानगढ़, नोहर, सरदार शहर, सीकर, कारीरी, घड़साना, पदमपुर, झुन्झनू और नागौर प्रमुख हैं।