>



जयपुर। प्रदेश में आती-जाती सरकारें पंचायत पुनर्गठन के नाम पर भले ही सैकड़ों नई ग्राम पंचायतें बना देती हों लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पंचायत नाम मिलने के बाद भी ये संस्थाएं वर्षों तक अपने ठिकाने के लिए तरसती रहती हैं। मौजूदा सरकार ने 1200 से अधिक नई ग्राम पंचायतें बनाई हैं लेकिन पांच साल पहले हुए ऐसे ही परिसीमन पर नजर डालें तो सच्चाई सामने आ जाती है। वर्ष 2014 में हुए परिसीमन में 723 नई पंचायतें बनाई लेकिन इस जनवरी तक इनमें से 343 को अपना कार्यालय भवन नहीं मिल पाया है। यानी पिछले चुनाव में निर्वाचित जन प्रतिनिधियों का पूरा कार्यकाल निकल गया लेकिन उन्हें अपने नया कार्यालय नसीब नहीं हुआ। पंचायत राज विभाग पुरानी पंचायतों को भवन तो दे नहीं पाया, सरकार ने फिर से नए परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर ली। पांच साल बाद भी प्रदेश में 723 ग्राम पंचायतों में से 380 पंचायतों के कार्यालय भवन ही तैयार हो पाए हैं। यही हाल पंचायत समिति भवनों का है। पांच वर्ष पहले गठित की गई 47 पंचायत समितियों में से अब तक सिर्फ 25 के लिए ही भवन तैयार हो पाए हैं। प्रदेश में 14 ग्राम पंचायत कार्यालय ऐसे हैं, जो 2104 में गठन के बाद से स्कूलों और अन्य सरकारी भवनों में ही संचालित हैं। इनमें डूंगरपुर, जयपुर, अलवर, बाड़मेर, धौलपुर और सिरोही जिलों की पंचायतें शामिल हैं। नए पंचायत चुनाव आ गए लेकिन इन पंचायतों का पूरा कार्यकाल इन भवनों में ही पूरा हो गया। वर्ष 2014 के परिसीमन में 13 ऐसे ग्राम पंचायत भवन हैं, जिनके लिए भूमि तो मिल गई लेकिन निर्माण कार्य ही शुरू नहीं हो पाया। जबकि 39 स्थानों पर सरकार उपयुक्त भूमि का चयन नहीं कर पाई है। इनमें सर्वाधिक 14 मामले अलवर के हैं। जयपुर में भी चार स्थानों के लिए जेडीए और सरकार के बीच खींचतान चल रही है