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बीकानेर। नेकी कर दरिया में डालज्वाली कहावत की तर्ज पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के अधिकारी आदेश जारी कर उसको भूल जाते है। शीर्ष अधिकारियों के आदेशों की पालना करना तो दूर की बात उनको खुद को याद तक नहीं रहता कि उन्होंने कब कौनसे और किस विषय में आदेश जारी किए है। ऐसा ही मामला ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज में सामने आया है। फरवरी-2019 में बीकानेर जिला परिषद ने एक आदेश जारी कर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के आदेश का हवाला देते हुए पंचायत प्रसार अधिकारियों को सर्किल आवंटित कर उनके कार्य को सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए थे। उसके बावजूद अभी तक आदेशों की पालना नहीं हुई है। अभी भी पंचायत प्रसार अधिकारी जिला परिषद तथा पंचायत समितियों में काम कर रहे है।
सरकार की ये थी मंशा
वर्ष 2009 में तत्कालीन कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार की ग्रामसेवकों (वर्तमान में ग्राम विकास अधिकारी नाम) को क्रमोन्नत कर उनको पंचायत प्रसार अधिकारी बनाने के पीछे ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज को सशक्त व मजबूती देने की मंशा थी। पंचायत प्रसार अधिकारी बनने के एक दशक बाद भी उनको काम नहीं मिल पाया है। ड्यूटी पर आधे से ज्यादा समय तक वे ठाले बैठे रहते हैं।
सर्किलों की पंचायतों का कार्य
पंचायत प्रसार अधिकारी बनाने के पीछे सरकार की मंशा पंचायती राज को सशक्त व मजबूत बनाने की थी। इसको लेकर उनको पांच-छह पंचायतों का सर्किल आवंटित किया जाना था। जहां पर वे होने वाले कार्यों का अवलोकन, ग्राम विकास अधिकारियों को संबल, तथा मनरेगा सहित अन्य कार्यों की आने वाली शिकायतों की जांच आदि कार्य करने थे। किंतु धरातल पर ऐसा कहीं भी नजर नहीं आ रहा है। आज भी ये पंचायत प्रसार अधिकारी फील्ड में न जाकर पंखे व कूलर के नीचे जिला परिषद व पंचायत समिति कार्यालयों में काम कर रहे है।
पंचायत प्रसार अधिकारी के अनुरूप काम नहीं
वर्तमान में पंचायत प्रसार अधिकारी जो काम कर रहे है। वह काम उनके कैडर के अनुरूप नहीं है। दिलचस्प बात तो ये है कि विकास अधिकारी भी इसमें हस्तक्षेप नहीं कर रहे है। कहीं न कहीं विकास अधिकारियों का निजी स्वार्थ इसमें आड़े आ रहा है। दिलचस्प बात तो ये है कि समय-समय पर आयोजित होने वाली बैठकों में दिए जाने वाले उच्च अधिकारियों के आदेश मात्र औपचारिक बनकर रह गए है।
इनका कहना है
‘इस प्रकार का मामला मेरे सामने नहीं आया है। आएगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।Ó
-नरेन्द्र पाल सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी