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कोरोना अस्तपालों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे 

बीकानेर। जिला कलक्टर नमित मेहता ने कहा की कोरोना पॉजिटिव रोगियों का जहां इलाज हो रहा है, उन अस्पतालों में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाए जाए। साथ ही अस्पताल परिसर में एक हेल्प डेस्क भी बनाई जाए। यह दोनों सुविधाएं डेडीकेटेड कोविड-19 रोगियों की व्यवस्थाओं पर निगरानी तथा अस्पताल में रोगियों की सहायता के लिए की जा रही है ताकि किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहे। अगर कोई कमी होगी तो  कैमरे में दिखाई  जा सकेगी अथवा हेल्प डेस्क पर रोगी का कोई परिजन शिकायत करता है तो उसे तत्काल शॉट आउट किया जाएगा। अगर समस्या का समाधान अस्पताल में होता है तो ठीक है, नहीं तो ऐसी समस्याओं का निस्तारण जिला स्तर पर और अगर जरूरत हुई तो राज्य स्तर से बातचीत कर दिशा निर्देश दिए जाएंगे और तत्काल समस्या का समाधान किया जाएगा।
मेहता सोमवार को कलेक्टेªट सभागार में कोविड-19 की प्रबंधन समीक्षा बैठक में बोल रहे थे।  उन्होंने प्राचार्य मेडिकल कॉलेज, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से कहा कि जितने भी डेडीकेटेड कोविड-19 के अस्पताल हैं, इनमें सी.सी.टी.वी. कैमरे शीघ्र ही लगा लिए जाए, ताकि कैमरों के माध्यम से उपचाराधीन रोगियों को दी जाने वाली सभी सुविधाओं पर निगरानी रखी जा सके और अगर कहीं किसी तरह की परेशानी कैमरे में रिकॉर्ड हो जाती है तो उसका निस्तारण भी करने में सीसीटीवी कैमरा सहायक रहेगा। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरा लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कैमरे के चलते रोगियों की किसी भी प्रकार की निजता भंग ना हो। उन्होंने कहा कि इसी तरह डेडीकेटेड कोविड-19 के अस्पताल के रोगियों की सहायता हेतु एक हेल्प डेस्क स्थापित की जाए। इस डेस्क के माध्यम से रोगी अथवा उसके परिजनों को दूरभाष, मोबाइल पर आवश्यक सहायता प्राप्त हो सके। डेस्क की स्थापना हो जाने से अगर रोगी के बारे में कोई सूचना उसका परिजन मांगे तो उसे तत्काल दी जा सकेगी।

पॉजिटिव आए रोगी तुरंत पहुंचे अस्पताल
जिला कलक्टर ने कहा कि कोरोना की जांच के बाद जैसे ही कोई व्यक्ति पॉजिटिव आ जाता है तो उसे तत्काल अस्पताल अथवा कोविड-19 सेंटर में शिफ्ट कर उपचार शुरू किया जाए। जिला मुख्यालय पर शहर को नो जोन में बांट रखा है, ऐसे में जैसे ही रोगी के चिन्हित होने की सूचना आती है तो तत्काल  संबंधित जोन के अधिकारी की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह रोगी को अस्पताल पहुंचाने का कार्य करें। साथ ही परिवार के अन्य लोग और आसपास के लोगों की जांच के लिए भी जांच व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कोरोना पॉजिटिव आने के बाद  अगर  रोगी को शिफ्ट करने में विलंब या किसी तरह की दिक्कत आती है तो संबंधित जोन प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सूचित करेगा। इस कार्य में कोताही बरतने वाले चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ के विरूद्ध सख्त कार्रवाई एपिडेमिक एक्ट के तहत तथा राज्य सेवा नियमों के तहत की जाएगी।

उपखंड मुख्यालय के रोगी वहां स्थापित कोविड-19 सेंटर में रहेंगे

मेहता ने कहा कि जिले के सभी उपखंड मुख्यालय पर कोविड-19 केयर सेंटर की स्थापना की गई है। ऐसे में संबंधित उपखंड क्षेत्र में अगर कोई कोरोना पॉजिटिव रोगी चिन्हित होता है तो उसे क्षेत्र के कोविड केयर सेंटर में ही इलाज के लिए भर्ती करवाया जाए। उन्होंने अधीक्षक पीबीएम अस्पताल और प्राचार्य मेडिकल कॉलेज से भी कहा कि कोरोना पॉजिटिव का इलाज जिला मुख्यालय पर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल तथा एम.सी.एस.सी विंग में बेहतर तरीके से हो रहा है। लेकिन फिर भी अगर चिकित्सकों को लगे कि किसी रोगी को जिला मुख्यालय पर स्थित अस्पताल से भी हायर इंस्टिट्यूशन की जरूरत है तो ऐसे रोगियों को हायर इंस्टिट्यूशन में भेजने के लिए भी किसी तरह की परेशानी नहीं आए और उसे तत्काल अन्यत्र शिफ्ट करने की अनुशंसा करते हुए हायर इंस्टिट्यूशन में भेजा जाए।
बैठक में अतिरिक्त आयुक्त उपनिवेशन प्रेमाराम पवार, अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) ए. एच. गौरी, रजिस्ट्रार तकनीकी विश्वविद्यालय अजीत सिंह राजावत, नगर विकास न्यास सचिव मेघराज सिंह मीना, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पवन मीना, प्राचार्य सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज डॉ. एस.एस. राठौड़, अधीक्षक पी.बी.एम. अस्पताल डाॅ. मोहम्मद सलीम, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी  डॉ. बी. एल. मीना सहित सभी जोन प्रभारी, चिकित्सक तथा एरिया मजिस्ट्रेट उपस्थित थे।