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खुलासा न्यूज बीकानेर। जब समस्त देशवासी भाई बहन के इस अटूट पवित्र रिश्ते को रक्षाबंधन के दिन मनाते है इसी दिन 730 वर्ष पूर्व सन् 1368 मे एक आक्रांता हमलावर महमूद गजनवी द्वारा पाली -राजस्थान से गुजरते वक्त जब वहा स्थापित पालीवाल ब्राह्मण समाज की सम्पन्नता व समृध्दि देखी तो उस लुटेरे की नियत खराब हो गयी और उसने उनके साथ लूटपाट व कत्लेआम किया , कत्लेआम के साक्ष्य स्वरूप ब्राह्मणों द्वारा धारण किऐ जाने वाली पवित्र जनेऊ लगभग सवा मन(50 किलो) व महिलाओं के सुहाग का प्रतीक चुडा नौ मन (360 किलो) वहा एकत्र हुआ जहाँ उनकी याद मे एक चबुतरा बनवाया गया आज भी उस हादसे का गवाह वो *धौला-चोतरा* स्थापित है। .उस आक्रमणकारी ने कत्लेआम व लुटपाट के पश्चात भी बचे हुए लोगो को परेशान व पिडित करने के लिऐ वहा के एकमात्र पेयजल सरोवर मे गाँयो की हत्या कर रक्त डाल दिया ..पालीवाल ब्राह्मणों को पाली छोडने के लिऐ विवश होना पडा। तब से आज तक पालीवाल ब्राह्मण समाज रक्षाबंधन पर्व नही मनाता है