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विद्युत निगमकर्मी असुरक्षित,चर्चाओं का बाजार गर्म
बीकानेर। बिजली बिल की वसूली हो या बिजली चोरी का मामला। विद्युतकर्मी दल रूपये देकर भी अपने आप को असुरक्षित महसूस करता है। जिसके चलते प्रभावशाली की कोप का भाजन भी बन जाता है। ऐसा ही नजारा गुरूवार शाम को करणीनगर क्षेत्र में देखने को मिला। जहां एक दबंग ने विद्युत कंपनी के दस्ते पर पिस्तौल तान ली। ये अलग बात है कि वो पिस्तौल नकली थी। किन्तु सवाल ये उठता है कि आखिर इस तरह की हिम्मत उसमें कैसे आई और विद्युत कंपनी के दस्ते में शामिल पुलिसकर्मी मूकदर्शक क्यों बने रहे। जबकि विद्युत कंपनी या निगम के दस्ते के साथ जाने वाले पुलिसकर्मियों को इसके लिये अलग से भुगतान दिया जाता है।
वेतन के अतिरिक्त मिलता है मानदेय
विश्वतसूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विद्युत कंपनी या विद्युत निगम की ओर से बिजली चोरी रोकने अथवा वसूली के लिये भेजे जाने वाले दल के साथ कम से कम तीन पुलिसकर्मियों का तैनात किया जाता है। इसमें एक महिला पुलिसकर्मी,एक हैडकास्टिबल व एक कास्टेबल होता है। इन पुलिसकर्मियों को उनके पद के अनुरूप निर्धारित मानदेय अलग से दिया जाता है। ये मानदेय कम से कम 1100 रूपये एक बारगी के होते है। यानि एक दस्ते के साथ तैनात पुलिसकर्मी को वेतन के अलावा 1100 रूपये अतिरिक्त मानदेय के रूप में दिये जाते है। उसके बाद भी इस तरह की घटनाओं पर खाकी की चुप्पी सोचनीय प्रश्न है।
घटना बना चर्चा का विषय
करणीनगर में हुई यह घटना सोशल मीडिया पर जिस तरह वायरल हुई। उससे चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया कि आखिर पुलिस के होते हुए विद्युत कंपनी के दल पर विरोध करने वाले युवक ने पिस्तौल तान ली और पुलिसकर्मी मौनीबाबा बने रहे। जबकि पुलिस वालों को उस युवक के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए थी। किन्तु ऐसा पुलिस ने क्यों नहीं किया। सोशल मीडिया पर यूजर भी घटना को लेकर खासे चटकारे ले रहे थे।