जयपुर। पंच व सरपंचों के चुनावों का पहला चरण मंगलवार से शुरू हो जाएगा। पहले चरण में 3847 पंचायतों में मंगलवार से चुनाव की लोकसूचना जारी की जाएगी। वहीं बुधवार को नामांकन पत्र भरे जाएंगे। इस बार शैक्षणिक बाध्यता समाप्त करने के अलावा अधिक परिवर्तन नहीं किए गए हैं। हालांकि, अभी तक लोगों में संतान संबंधी नियम को लेकर पशोपेश की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, लोगों को उम्मीद थी कि सरकार इस बाध्यता को भी हटाएगी। अभी तक संतान संबंधी प्रावधान चुनाव में लागू हैं। 1995 के बाद दो से अधिक संतान वाले लोग चुनाव के लिए नामांकन नहीं भर पाएंगे।
ये है संतान संबंधी प्रावधान
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा (ठ) के प्रावधानों के अनुसार दो से अधिक संतान वाला व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। लेकिन दो से अधिक संतान वाले किसी व्यक्ति को तक तक अयोग्य नहीं माना जाएगा, जब तक की 24 अप्रेल 1994 को विद्यमान उसकी संतान की संख्या में और वृद्धि नहीं हो जाती है। इसमें 23 अप्रेल 1994 से 27 नवम्बर 1995 तक की अवधि में पैदा हुई केवल एक संतान को छोड़ा गया है। तारीख 23 अप्रेल 1994 को या उसके बाद जहां किसी दम्पति के किसी पूर्ववर्ती प्रसव या प्रसवों के केवल एक बच्चा हो। वहां किसी एक ही पश्चातवर्ती प्रसव से पैदा हुए बच्चों की किसी संख्या को एक ही समझा जाएगा। बच्चों की कुल संख्या की गणना करते समय ऐसे बच्चों को नहीं गिना जाएगा जो पूर्व के प्रसव से जन्मा हो और दिव्यांगता से ग्रसित हो।
सहमति पत्र देना अनिवार्य
इस बार खास बात है कि प्रत्याशियों को नामांकन पत्र के साथ 50 रुपए के गैर न्यायिक स्टाम्प पेपर पर सहमति पत्र देना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने पर नामांकन खारिज हो जाएगा।
निर्वाचन विभाग की पंचायत चुनाव में नई व्यवस्था, प्रत्याशी को नामांकन के साथ देना होगा शपथ पत्र
सरपंच के लिए चुनावी खर्च सीमा बढ़ाई, पंच के लिए सीमा तय नहीं
आयोग ने सरपंच का चुनाव लडऩे के लिए चुनावी खर्च की सीमा बढ़ाई है। सरपंच पद के उम्मीदवार 50 हजार रुपए तक खर्च कर सकेंगे। साल 2014 के चुनाव में यह सीमा केवल 20 हजार रुपए थी। वहीं पंच पद के उम्मीदवारों के लिए किसी प्रकार की सीमा का निर्धारण नहीं किया गया है। जबकि चार चरणों में 1,09,314 वार्डों में वार्ड पंच चुने जाएंगे। चुनावी खर्च तय नहीं होने से उम्मीदवार बेहिसाब खर्च भी करेंगे। जिसका आयोग के पास ब्यौरा भी नहीं होगा।
पहली बार ईवीएम से चुनाव प्रदेश में पहली बार सरपंच पद का चुनाव पूरी तरह से ईवीएम से करवाया जाएगा। हालांकि पंचों का चुनाव अभी भी मतपत्र से ही होगा। पहली बार नामांकन पत्र दाखिल करने से मतदान तक सात दिन का समय मिलेगा। जिसमें प्रत्याशी भरपूर प्रचार कर पाएंगे।