अजमेर। राजस्थान लोक सेवा आयोग की तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2004 में वंचित अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। आयोग ने इस मामले की फाइल लगभग बंद कर दी है। साथ ही अभ्यर्थियों को भेजे जवाब में भी यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अब नियुक्ति नहीं मिल सकती।शिक्षक भर्ती 2004 में वंचित अभ्यर्थी पिछले 15 साल से नियुक्ति के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि उक्त भर्ती में आयोग की ओर से मनमर्जी का आरक्षण प्रावधान लागू करके हॉरिजेंटल में 2354 महिलाओं को अधिक पोस्टिंग दे दी, जबकि इन पदों पर पुरुष अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जानी थी। इसे लेकर आयोग ने कुछ अभ्यर्थियों को भेजे जवाब में लिखा है कि तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2004 में रिक्त रहे पदों के विरुद्ध समय-समय पर परिणाम जारी किए गए। कार्मिक विभाग के आदेश पर नया विज्ञापन जारी होने के बाद पुरानी भर्ती पक्रिया स्वत: ही समाप्त हो जाती है और नया विज्ञापन 2006 में ही जारी किया जा चुका है। आयोग ने लिखा है कि इस संबंध में दायर रिव्यू याचिका भी खारिज की जा चुकी है। आयोग का यह भी कहना है कि एक अभ्यर्थी को कोर्ट के आदेश पर नियुक्ति दी गई है, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस नियुक्ति को नजीर नहीं माना जाए।
गुमराह कर रहा आयोग, जारी रहेगा संघर्ष
इस संबंध में चयनित बेरोजगार तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती -2004 संघर्ष समिति का कहना है कि आयोग बेरोजगारों और सरकार को गुमराह कर रहा है। संघर्ष समिति के मुकेश त्रिवेदी ने कहा कि एक तरफ आयोग ने 2019 में प्रतीक्षा सूची जारी कर एक अभ्यर्थी को नियुक्ति दी है, दूसरी तरफ 2354 महिलाओं की अधिक नियुक्ति की गलती को छिपा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।