इस प्रकार उठाते है भामाशाह का लाभ निजी अस्पताल
बीकानेर। राज्य सरकार ने भामाशाह योजना जरूरतमंद रोगियों के बेहतर इलाज के लिये शुरू की है। लेकिन इस योजना का राजकीय सेवारत चिकित्सक निजी अस्पतालों से मिलकर किस तरह लाभ उठाते है। इसका जीता जागता उदाहरण आचार्य तुलसी कैंसर रिसर्च केन्द्र में भर्ती 74 वर्षीय भंवरसिंह है। जो भर्ती तो पीबीएम के कैंसर अस्पताल में था। लेकिन उसका सारा इलाज फोर्टिस टीएम अस्पताल में किया गया और इलाज पेटे सरकार के खजाने से एक लाख से ज्यादा की राशि भी उठा ली गई। जानकारी मिली है कि रोगी भंवरसिंह का इलाज कैंसर अस्पताल में चल रहा है। अस्पताल के भामाशाह प्रभारी की मिली भगती से मरीज को भामाशाह योजना के तहत फोर्टिज टीएम अस्पताल भेज दिया गया। जिसकी दवाईयां तो सरकारी दी जा रही है,किन्तु भामाशाह में सरकार की ओर से लाखों रूपये तक इलाज की नि:शुल्क व्यवस्था के चलते कैंसर अस्पताल के भामाशाह प्रभारी ने मरीज को निजी अस्पताल भेजकर यहां उसका इलाज करवाया। जिसकी राशि राजस्थान स्टेट हेल्थ इन्सोरेंस एजेन्सी की ओर से टीआईडी नं 70105196381173 रूपये 17 हजार (दिनांक एक मई 2019),टीआईडी नं 805196454871 रूपये 17 हजार (दिनाक 8 मई 2019) तथा टीआईडी नं 305196504459 रूपये 30 हजार (दिनांक 13 मई 2019) उठा ली।
जिला प्रशासन के संज्ञान में है मामला
मजे की बात ये है कि इस मामले की जानकारी न सिर्फ चिकित्सा महकमें को है,बल्कि जिला प्रशासन को भी है। फिर भी ठोस कार्यवाही करने की बजाय विभागीय स्तर पर महज नोटिस देकर इतिश्री की जा रही है। हालाकि समय समय पर अनेक बार ऐसी शिकायतें होती रही है। किन्तु न तो प्रशासन और न ही सरकार इस ओर ध्यान दे रही है।
शिकायत के बाद भामाशाह प्रभारी को नोटिस
जानकारी मिली है कि आरटीआई कार्यकर्ता रविन्द्र सारस्वत ने जिला कलक्टर को मरीज के परिजन की लिखित शिकायत पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होने की बात कही और एक ज्ञापन
जिला कलक्टर को देकर इस तरह सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा निजी अस्पतालों में भामाशाह रोगियों का जबरन इलाज करवाने की ओर ध्यान आकर्षित किया था। जिस पर जिला कलक्टर ने सीएमएचओ को इसकी पुष्टि करने के निर्देश दिए। जिस पर सीएमएचओ डॉ देवेन्द्र चौधरी ने डॉ मुकेश सिंघल द्वारा की जा रही इस प्रकार की हरकतों की पुष्टि की। लेकिन सीएमएचओ की रिपोर्ट में अन्य अस्पताल का जिक्र भी किया गया है। जो इस बात का संकेत मिल रहा है कि किस तरह निजी अस्पताल सरकारी की इस महत्वकांक्षी योजना का नाजायज फायदा उठाकर राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे है।
सोई है सरकार
हालात ये है कि एक ओर सरकारें भ्रष्टाचार व भयमुक्त शासन का दावा करती है वहीं दूसरी ओर किस कदर भ्रष्टाचार हो रहा है। उस पर लगाम लगाने के कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे है।जिससे भ्रष्टाचार करने वालों के हौसले बुलंद हो रहे है।