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बीकानेर। राजस्थानी-हिन्दी के कवि-कथाकार रवि पुरोहित की बाल कहानी ‘और लूसी सुधर गई’ को मलयालम भाषा में अनुवाद के लिए चयनित किया गया और देश भर के 20 चुनिंदा बाल साहित्यकारों के साथ केरेला स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ चिल्ड्रेन, त्रिवुनंतरपुरम द्वारा प्रकाशित ‘हिन्दी बालाकाढकल’ संग्रह में प्रकाशित किया गया है। डॉ.प्रमोद कोवरपथ द्वारा संकलित एवं गायत्री देवी जे.ए. द्वारा संपादित यह महत्वपूर्ण संकलन  इन दिनों चर्चा में है । लोक चेतना की राजस्थानी तिमाही ‘राजस्थली’ के प्रबंध संपादक पुरोहित को साहित्य अकादमी, दिल्ली, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर, राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर, राजस्थान सरकार, रोटरी क्लब के बृज-उर्मी अग्रवाल काव्य पुरस्कार, हिन्दी साहित्य संसद,चूरू, महेन्द्र जाजोदिया पुरस्कार, दिल्ली, अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन, कोलकाता सहित देश-प्रदेश की शताधिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित-पुरस्कृत किया जा चुका है  और विभिन्न विधाओं की 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी  है । पुरोहित की राजस्थानी काव्य कृति ‘उतरूं ऊंडै काळजै’ की रचनाओं का हिन्दी, अंग्रेजी, पंजाबी, संस्कृत, स्पेनिश, मराठी, बांग्ला, उड़िया, तेलगू और नेपाली सहित कई भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं और 4 भाषाओं में तो पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित हो चुके हैं ।