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जयपुर। राजस्थान में विधानसभा का बजट सत्र आहूत हो चुका है और इसकी नियमित कार्यवाही भी शुरू हो चुकी है। इसी दौरान सम्भवत: 17 फरवरी को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वित्त मंत्री होने के नाते राज्य का बजट पेश करेंगे। मौजूदा कार्यकाल में यह उनका दूसरा बजट होगा। बजट को लेकर सरकार की तैयारियां जोर-शोर स ेचल रही है। केन्द्र का बजट आने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि केन्द्र से अगले वित्तीय वर्ष के लिए राज्य को कितनी राशि मिलने की सम्भावना है। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं के मद में मिलने वाली राशि की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है। ऐसे में अब राज्य के बजट में शामिल क ी जाने वाली योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

आर्थिक स्थिति संकट में-

मौजूदा वित्तीय वर्ष में सरकार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। तीसरी तिमाही पूरी होने तक सरकार की आय करीब 60 प्रतिशत ही हो पाई है। जो पिछले वर्ष इसी अवधि के मुकाबले करीब तीन प्रतिशत कम है। कर राजस्व की बात की जाए तो दिसम्बर तक सिर्फ 58 प्रतिशत आय हो पाई थी जो पिछले वर्ष के मुकाबले आठ प्रतिशत कम है। उधर केन्द्र सरकार ने भी मौजूदा वित्तीय वर्ष में केन्द्रीय करो में राजस्थान को मिलने वाली हिस्सा राशि को 46,411 करोड़ से कम कर 36,049 करोड़ रूपये कर दिया है। इस प्रकार, राज्य को मिलने वाली करो में हिस्सा राशि में कुल 10,362 करोड़ रूपये की कमी की गई है। इसी प्रकार, वर्ष 2019-20 के बजट अनुमानों में विभिन्न योजनाओं के लिए घोषित केन्द्रीय अनुदान राशि में 4,000 करोड़ रूपये की भारी कमी की गई है।