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हाईकोर्ट में विचाराधीन है जनहित याचिका
बीकानेर। उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा बीकानेर में रेलवे फाटक की समस्या के समाधान के लिए बीकानेर बाईपास रेलवे लाइन निर्माण के संबंध में जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री डॉ बी डी कल्ला को अवगत कराया गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे के अपर महाप्रबंधक एस के अग्रवाल ने डॉ कल्ला को लिखे गए एक पत्र में जानकारी दी गई कि वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा इस समस्या के समाधान के लिए बीकानेर बाईपास रेलवे लाइन की संभावनाओं पर रेलवे को पुनर्विचार करने के संबंध में लिखा गया है। पत्र में बताया गया कि रेलवे बाईपास के निर्माण के लिए वर्ष 2004 में रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत किया गया था। जिसमें परियोजना की लागत का शत-प्रतिशत राशि राजस्थान सरकार ने वहन करने की सैद्धांतिक सहमति दी थी।

यह परियोजना 4 चरणों में पूरी करने का प्रस्ताव था तथा कार्य के प्रारंभिक आकलन में 60 करोड़ 24 लाख रुपए की लागत के विरुद्ध राज्य सरकार ने 1 करोड़ रुपए रेल राजस्व में जमा कराए थे। बाद में इस परियोजना के अंतर्गत आने वाली सरकारी और गैर सरकारी भूमि का आवर्जन करने के संबंध में भी दोनों एजेंसियों के मध्य विचार विचार विमर्श हुआ तथा इस संबंध में कुछ प्रगति भी हुई । परंतु रेल विभाग से वर्तमान बीकानेर से लालगढ़ रेलवे लाइन को हटाने के बिंदु पर विचार स्पष्ट करने को लेकर रेलवे ने अपनी असहमति जताई साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि इस लाइन पर कोचिंग संचालन में कोई कमी नहीं की जाएगी। रेलवे के स्पष्टीकरण के बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2006 में जमा राशि लौटाने की मांग रखी जिसे सर्वे की लागत को हटाकर रेलवे द्वारा राज्य सरकार को राशि लौटा दी गई।  पत्र में बताया गया है कि बीकानेर शहर में कोस्ट शेयरिंग के आधार पर क्रमश: संख्या 138 तथा 139 की एवज में आरओबी का निर्माण किया जा चुका है। इसी दौरान एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा परियोजना पर उच्च न्यायालय जोधपुर में एक जनहित याचिका दायर की गई है यह याचिका वर्तमान में भी लंबित है।