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बीकानेर। बार बार चिकित्सक लापरवाही का गढ़ बन चुकी श्रीराम अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही का खामियाजा एक परिवार को अपनी युवक को खोकर चुकाना पड़ा। अस्पातल के चिकित्सक डा हरीश अग्रवाल व डॉ. प्रवेश तनेजा और अस्पताल के मालिक जोधपुर के डॉ.सुनील चांडक की लापरवाही से नापासर मूल के हाल ही बंगला नगर में विश्वकर्मा मंदिर के पीछे रहने वाले 21 वर्षीय नरेन्द्र पुत्र हरी किशन सोनी की मौत हो गई। स्वर्गीय सोनी एकलोते पुत्र थे। वे शादीशुदा है तथा उनके एक सावा साल की पुत्री हैं।
मृृतक नरेरद्र के आसामयिक निधन पर स्वर्णकार समाज के लोगों ने श्रीराम अस्पताल के संचालक व दोषी चिकित्सकों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए रोष व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन, पुलिस और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से कानूनी कार्यवाही करते हुए मृृतक के परिजनों को न्याय दिलाने की मांग की है। नरेन्द्र के सोमवार को पी.बी.एम.अस्पताल के निधन के बाद स्वर्णकार समाज के लोग बड़ी संख्या में श्रीराम अस्पताल के आगे पहुंचे तथा पार्थिव देह के साथ प्रदर्शन किया तथा लापरवाह चिकित्सकों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की। मृृतक के पिता हरि किशन सोनी ने बताया कि 13मई 2019 को उसके उसके गुर्दे में दर्द हुआ तथा श्रीराम अस्पताल दिखाया गया। अस्पताल में दिनांक 14 व 15 मई को उसको बुखार व असहनीय दर्द पुन: हुआ। श्रीराम अस्पताल के चिकित्सक डॉ.हरीश अग्रवाल ने ऑपरेशन की सलाह दी तथा 15 मई को 20 हजार रुपए जमा करवा लिये। सर दर्द, पत्थरी का दर्द व बुखार के कारण न्यूरोफिजिशियन को भी दिखाया गया तथा सिटी स्केन करवाई गई। सिटी स्केन सामान्य होने से न्यूरेाफिजिशियन डॉ.जगदीश कूकना ने सुझाव दिया की सर से संबंधित कोई बीमारी नहीं है। गूर्दे में पत्थरी का ईलाज करवावें। इसलिए श्रीराम अस्पताल पुन: ले जाया गया।
दिनांक 15 को ही राशि जमा करवाने व तमाम जांचों के बाद ऑपरेशन के दौरान गलत इलाज करने, सही तरीके से बेहोशी की दवा व ऑक्सीजन नहीं देने से नरेन्द्र की हालत बिगड़ गई। चिकित्सकों ने ऑपरेशन चालू करने के थोड़ी देर बाद ही थियेटर के दरवाजे बंद कर लिये तथा गार्ड को बुला लिया। परिजनों ने घबराहट व चिंता के साथ चिकित्सकों से पूछा की नरेन्द्र लिफ्ट खराब होने के बावजूद दो मंजिल चलकर ऑपरेशन थियेटर में गया अब अचानक वह बेहोश कैसे हो गया। चिकित्सकों ने कहा कि आप युवक को जयपुर ले जाएं हमारे बस की बात नहीं है। बाद में बात कर लेंगे युवक की जान खतरे में देखते हुए तत्काल जयपुर ईलाज के लिए ले जाया जाए। चिकित्सकों ने कहा कि हमारी कुछ गलती व कमी रही है, जिससे युवक की तबियत बिगड़ी है। उसी वक्त नरेन्द्र को जयपुर ले जाया गया तथा इंटरनल अस्पताल में 16 मई को सुबह भर्ती करवाया गया। इंटरनल अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि रोगी नरेन्द्र के फेफड़ों में पानी तथा सिर में खून का थक्का पूर्ण आक्सीजन नहीं देने से हुआ है। इंटरनल अस्पताल के चिकित्सकों ने अपनी ओर से 29 मई तक इलाज किया। आर्थिक कारणों से 29 मई को पुन: जयपुर से बीकानेर के पी.बी.एम. अस्पताल के न्यूरो विभाग में भर्ती करवाया गया, जहां उसका आज निधन हो गया।
पूर्व में भी हो चुक ी है मौते
आपको बता दे कि पूर्व में भी अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही के कारण दो तीन जनों की जान जा चुकी है। जिसके चलते पीबीएम के चिकित्सक इसमें दोषी पाएं गए और उन्हें एपीओ भी किया गया।