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बीकानेर। सरकार एक ओर बेहतर चिकित्सा आमजन को देने के जतन कर रही है। लेकिन सरकार की इस मंशा पर उन्ही के कार्मिक पानी फेर रही है। जिसका जीता जागता उदाहरण सिटी डिस्पेंसरी नम्बर 6। जहां राजनीति इतनी हावी हो रखी है कि डिस्पेंसरी मे बैठे डाक्टर और कर्मचारी छोटी छोटी बातों को लेकर मंत्री तक की धमकी देते है। नत्थुसर गेट के बाहर बनी डिस्पेंसरी में आये दिन कुछ ना कुछ होता रहता है ये डिस्पेंसरी पूरी तरह से राजनैतिक अखाड़ा बन चुकी है। डिस्पेंसरी में कार्यरत डॉक्टर व कर्मचारी अपने अपनी कर्मचारियों को आये दिन धमकी देते रहते है कि हमारे साथ किासी प्रकार से दबाब डाला तो बीकानेर से तबादला करवा देंगे और बाहर की व्यक्तियों का हस्तेक्षप प्रत्येक कार्य में रहता है। बाहरी लोग दिनभर अस्पताल परिसर में चक्कर काटते रहते है।
10 में से 8 बाहर करवाते है जांच
सूत्रों से जानकारी मिली है कि जो जांच अस्पताल में नि:शुल्क होती है उसको भी बाहर करवा जाता है कि जानकारी है कि अगर 10 मरीजों को जांच करवानी हो तो आठ तो बाहर से करवाते है। इसका कारण है अस्पताल के बाहर बनी लेब के संचालक दिनभर अस्पताल में चक्कर लगाते रहते है।
सीबीसी जांच के नाम पर लूट
सूत्रों ने बताया कि अगर डाक्टर के पास दिनभर में 10 मरीज आये तो उसमें से 6 मरीजों की सीबीसी जांच लिखी जाती है। जो कि अस्पताल में नहीं होती है उसकी जांच बाहर से करवाई जाती है।
अस्पताल में इंजेक्शन फिर भी बाहर से
कई बार देखा जाता है कि जो इंजेक्शन अस्पताल में अंदर नि:शुल्क उपलब्ध है फिर भी मरीजों से इंजेक्शन बाहर से मगवाये जाते है  इससे ये साफ जाहिर हो रहा हँै कि अस्पताल में सीएमएचओ व डॉक्टर की नहीं बाहर के लोगों की चतली है।
नहीं लगे सीसीटीवी कैमरे
राज्य सरकार का एक आदेश है कि सभी डिस्पेंसरियों में सीसीटीवी कैमरे लगा दिये जाये लेकिन कुछ डिस्पेंसरियों में एलईडी लगाकर अपना काम कर दिया और कैमरे बंद पड़े है। कुछ डिस्पेंसरी में कैमरे लगे ही नहीं है। जबकि राज्य सरकार का आदेश करीब एक साल पहले ही हो चुका है। लेकिन अब तक राज्य सरकार के आदेशों की पालना नहीं हो रही है ना ही सीएमएचओ इन पर कोई ध्यान दे रहे है।
इनका कहना है- बाहरी लोगों का हस्तेक्षप नहीं होना चाहिए अगर होता है वो गलत है इससे डॉक्टरों व कर्मचारियों पर दबाब बनता है। जो जांच व दवाई अंदर मिल रही है तो उसको बाहर की लिखनी ही नहीं चाहिए।
नरेश जोशी
पाषर्द