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बीकानेर। राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार एवं राजस्थानी भाषा मान्यता आंदोलन के प्रवर्तक कमल रंगा को उनकी चर्चित काव्य पुस्तक ‘अदीठ साचÓ के लिए नेम प्रकाशन डेह (नागौर) एवं अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति द्वारा घोषित मायड़ भाषा राजस्थानी पुरस्कार 2019 के तहत पारसमल पांड्या राजस्थानी साहित्य पुरस्कार नागौर के डेह के कुुंजल माता सभागार में प्रदत किया गया। आयोजक पवन पहाडिय़ा के अनुसार 14 मार्च 2020 को आयोजित समारोह में रंगा को 11000 रू नगद, मान-पत्र, शॉल, साफा, प्रतीक चिन्ह, श्रीफल आदि द्वारा पुरस्कृत-सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ आईदान सिंह भाटी मुख्य अतिथि एवं राजस्थानी विद्वान प्रोफेसर कल्याणसिंह अध्यक्ष थे। साथ ही संस्था के प्रतिनिधि आयोजक पवन पहाडिय़ा एवं लक्ष्मणदान कविया उपस्थित थे।कमल रंगा की पुरस्कृत कृति ‘अदीठ साचÓ राजस्थानी का पहला ऐसा काव्य संग्रह है जिसमें त्रेतायुग, द्वापरयुग एवं अन्य पौराणिक काल के चरित्रों एवं घटनाओं को लेकर आज के समकालीन संदर्भ एवं आधुनिक बोध के साथ कविताएं रची गई हैं। जिसमें विशेष तौर पर नारी एवं दलित पात्रों पर महत्वपूर्ण रचनाएं संकलित हैं। इस भव्य सम्मान समारोह में पूरे प्रदेश के साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी व गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम में दीनदयाल ओझा, अब्दुल समद राही, पत्रकार बाबूलाल टॉक, कासिम बीकानेरी,डेह गांव के सरपंच डॉ गजानन्द चारण,डॉ बसन्ती पंवार,शिवशंकर भादाणी, माजिद खां गौरी, सत्यदेव चूरा,किशन जोशी उपस्थित थे। कार्यक्रम में निर्णायक के रूप में प्रोफेसर कल्याण सिंह शेखावत, डॉ. मनोहर सिंह राठौड़, डॉ. श्याम सुंदर भारती, डॉ गजादान चारण, डॉ. चेतन स्वामी एवं लक्ष्मणदान कविया शामिल थे।