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जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच अब दिल्ली से चौंकाने वाली खबर आ रही है.  सूत्रों की माने तो गहलोत और पायलट कैंप के झगड़ों को निपटाने के लिए सोनिया गांधी के स्तर पर आखिरी कोशिश हो रही है. सोनिया कल ही अस्पताल से लौटी है. ऐसे में अब अगले तीन-चार दिनों में गांधी परिवार राजस्थान में कांग्रेस को टूटने से बचाने की आखिरी कोशिश कर सकता है.  2 दिन पहले खुद गहलोत बागी विधायकों के माफी मांगने पर उन्हें गले लगा लेने का इशारा दे चुके हैं. लेकिन पायलट कैंप से जुड़े सूत्रों ने बागी विधायकों के किसी भी सूरत में माफी नहीं मांगने के स्पष्ट संकेत दिए हैं. फिर अब गहलोत-पायलट की लड़ाई में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से BJP भी एक फैक्टर बना नजर आ रहा है.  पायलट और भाजपा मानसिक एवं वैचारिक रूप से एक-दूसरे के काफी निकट आ चुके हैं. ऐसे में वापस कांग्रेस में लौटने का फैसला पायलट अकेले नहीं ले पाएंगे. इसके लिए उन्हें दिल्ली में अपने ‘राजनीतिक मित्रों’ से बाकायदा सलाह-मशविरा करना होगा. इसलिए कुल मिलाकर पायलट कैंप के कदम वापस खींचने की संभावना बहुत क्षीण नजर आ रही है. दूसरी ओर विधानसभा सत्र के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट गुट के रुख पर सस्पेंस बरकरार है.वहीं मिली जानकारी के अनुसार पायलट कैम्प के सभी विधायक विधानसभा सत्र में शामिल होंगे. हालांकि सदन में सरकार के विश्वासमत हासिल करने के लिए फ्लोर टेस्ट होने की संभावना पर आखिरी फैसला सचिन पायलट ही तय करेंगे.