जयपुर। राजस्थान में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण को देखते हये अशोक गहलोत सरकार ने इसके मरीजों के इलाज की नई दरें तय कर दी हैं. राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों में इलाज की दरों को लेकर मिल रही शिकायतों के बाद यह अहम और बड़ा कदम उठाया है. सरकार को लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि सरकार की ओर से गत जून माह में कोरोना के इलाज की जो दरें निर्धारित की गई थी उसके बावजूद निजी अस्पताल मरीजों से मनमानी राशि वसूल रहे हैं.
इस पर सरकार ने इस बार अस्पतालों को दो श्रेणियों में बांटकर कोरोना के इलाज की दरें तय की है. राज्य सरकार ने अस्पतालों को नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेट्रीज और नॉन हृ्रक्चरु अस्पताल की दो श्रेणियों में बांटते हुए कोरोना मरीजों के इलाज की यह दरें तय की हैं. इन दोनों ही श्रेणी के अस्पतालों में मरीजों को तीन श्रेणियों मॉडरेट, सीवियर और वेरी सीवियर मरीजों की श्रेणी में बांटा गया है और उसी के अनुरूप दरें तय की गई हैं.
5000 से 9900 रुपए तक की दरें तय
अस्पताल में मॉडरेट श्रेणी के मरीज से 7 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहने पर उससे 5500 रुपए लिये जा सकेंगे. सीवियर श्रेणी के मरीज के 10 दिन भर्ती रहने पर उससे 8,250 रुपए लिये जा सकेंगे. वहीं वेरी सीवियर श्रेणी के मरीज के 10 दिन भर्ती रहने पर से उससे अधिकतम 9900 रुपये का शुल्क तय किया गया है. इसमें क्कक्कश्व किट के 1200 रुपए भी शामिल कर दिए गए हैं. इसी प्रकार नॉन हृ्रक्चरु अस्पताल में मॉडरेट श्रेणी के मरीज से 7 दिन अस्पताल में भर्ती रहने के 5000 रुपए से ज्यादा नहीं लिये जा सकेंगे. सीवियर श्रेणी के मरीज के 10 दिन भर्ती रहने पर उससे 7500 रुपए लिये जायेंगे. वहीं वेरी सीवियर श्रेणी के मरीज के 10 दिन भर्ती रहने पर से 9000 रुपये का शुल्क लिया जा सकेगा. इसमें में भी पीपी किट के 1200 रुपए शामिल कर दिए गए हैं.
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इन सभी के चार्ज हैं इनमें शामिल
इस शुल्क में परामर्श चार्ज, नर्सिंग चार्ज, बेड और खाने का शुल्क भी शामिल किया गया है. मरीज के डिस्चार्ज करने पर कोविड-19 टेस्ट और पीपीई किट भी इन दरों में शामिल होंगे. कोरोना के उपचार में काम आने वाली दवाएं भी पैकेज में शामिल की गई हैं. इसमें हाइड्रोक्लोरोक्वीन, लोपिनावीर, ओसाल्टामिविर, डॉक्सीसाइक्लिन सहित अन्य दवाएं शामिल की गई हैं. सरकार को उम्मीद है कि इलाज की दरें कम होने से कुछ अस्पताल जो आईसीयू और वार्ड की कमी बताकर इलाज करने से बच रहे थे वे अब ऐसा नहीं कर पायेंगे. वहीं मरीज को भी अब राहत मिलेगी और उन्हें समय पर इलाज मिल सकेगा.