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बीकानेर। केन्द्र व राज्य सरकार लाख जतन कर लें किन्तु सरकारी संस्थानों में अनियमितताओं को खत्म नहीं कर सकती। सरकार में बैठे लालफीताशाही कहने को तो अनेक नियम कायदों की आड़ में काम करते है। किन्तु सरकार के धन का दुरपयोग करने में ऐसे अधिकारियों के लिये ये नियम कायदे कही आड़े नहीं आते। ऐसा ही सीईटी कॉलेज में देखने को मिल रहा है। जहां एआईसीईटी के मानदंड़ों को धता बताकर यहां के प्राचार्य डॉ संजय कुमार बंसल ने अपनी नियुक्ति के बाद से आज तक न तो एक कालांश लिया है और न ही प्रायोगिक कक्षा। जबकि नियमानुसार प्राचार्य को कम से कम 6 घंटे साप्ताहिक कक्षा में लेना अनिवार्य है। परन्तु बंसल ऐसा नहीं करने रहे। यहीं नहीं बिना कालांश वेतन के अलावा प्राचार्य बंसल कॉलेज से विशेष भत्ता भी उठा रहे है। मंजर ये है कि सीईटी का बीटीयू में विलय होने के बाद भी उन्हें दस हजार रूपये का विशेष भत्ता मिल रहा है। अगर विवि के नियमों की ही बात करें तो कि सी भी प्राचार्य व प्राध्यापक को इस प्रकार भत्ते का कोई प्रावधान नहीं है। मजे की बात तो यह है कि विवि के बोम बैठकों में भी इस प्रकार का कोई नियम या एजेण्डा पारित नहीं कि या गया है।
पूर्व में भी रहे है विवादों में
आपको बता दें कि सीईटी के प्राचार्य डॉ संजय बंसल कॉलेज के शैशव काल से विवादों में रहे है। इनकी डिग्रीयों को लेकर अनेक बार विभागीय शिकायत भी हुई है। इतना ही नहीं फ र्जी दस्तावेज पेश कर प्राचार्य पद प्राप्त करने के आरोप भी इन पर लग चुके है। जिनकी विभागीय जांच भी की जा रही है। कुछ समय पहले विद्यार्थियों के लिये केन्द्र सरकार से आए फंड से अपने कक्ष में एसी लगाने की शिकायत की पुष्टि भी हुई है। बंसल के खिलाफ कई भ्रष्टाचार के मामलों में अधिवक्ता सुरेश गोस्वामी ने बीछवाल थाने में एफआईआर भी दर्ज क रवा रखी है। जिनकी जांच भी चल रही है।
सरकारें कतरा रही है कार्यवाही से
हालात ये है कि सीईटी व ईसीबी के साथ बीटीयू में प्रकाश में आए भ्रष्टाचार के अनेक मामलों में सरकारें कार्यवाही से कतरा रही है। पूर्व में भाजपा सरकार के कार्यकाल में समाचार पत्रों में खबरों के प्रकाशन के बाद भी न तो विभाग स्तर पर कार्यवाही हुई और न ही सरकार ने ऐसे प्रकरणों के प्रति गंभीरता दिखाई और अब कांग्रेस की सरकार में भी भ्रष्टचार में लिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों पर किसी प्रकार की कार्यवाही की जा रही है। जबकि मुख्यमंत्री अपने भाषणों में अनेक बार सुशासन व भ्रष्टाचार रहित शासन देने की बातें कह चुके है। उनक ी ये बातें लगता है महज बातें ही प्रतीत हो रही है। बीकानेर की इंजीनियरिंग कॉलेज,सीईटी व अब बीकानेर तकनीकी विवि में हो रहे भ्रष्टाचार पर आखिर सरकार क्यों चुप है। इसका जबाब तो भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है।
शिकायत के बाद भी वहीं ढाक के तीन पात
इन मामलों को लेकर राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक एवं अत्याचार विरोधी टाईगर्स संस्थान नई दिल्ली के जांच एवं सतकर्ता अधिकारी सुरेन्द्र जाखड़ ने तकनीकी शिक्षा सचिव जयपुर को शिकायती पत्र भी लिखा है। उसके बाद भी अब तक न तो प्राचार्य से कोई वसूली की गई और न ही कोई कार्यवाही।
अधिकारी नहीं दे रहे जबाब
इस मामले को लेकर जब हमारे संवाददाता ने प्राचार्य डॉ बंसल व कुलपति से पूरी सत्यता जाननी चाही तो उन्होंने किसी प्रकार का कोई जबाब नहीं दिया और न ही अपने पक्ष में कोई बात कही। जबकि उच्चाधिकारी तो इस मामले को लेकर ही अनभिज्ञता जताते नजर आएं।