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– महाराजा एम.आर.आई. टेण्डर एक्सटेंड मामला, जल्द होगा भंडाफोड़
– विवाद में फंसा बीकानेर महाराजा एम.आर.आई. का टेण्डर एक्सटेंड
खुलासा न्यूज़,  बीकानेर। बीकानेर संभाग के सबसे बड़े अस्पताल पीबीएम अस्पताल आए दिन सुर्खियों में रहता है। इस बार पीबीएम में 200 करोड़ रुपए के घोटाले की तैयारी बड़े स्तर पर चल रही है। महाराजा एम.आर.आई के टेण्डर को आगे बढ़ाया जा रहा है। दरअसल मामला यूं है कि महाराजा एम.आर.आई का टेण्डर 10 साल के लिए जारी हुआ था। इसके बाद 7 साल और आगे बढ़ा दिया और अब 10 साल तक और आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है।  बताया जाता है कि इस टेण्डर प्रणाली को लेकर बीकानेर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने एफ.ए. संजय धवन के पास रिपोर्ट के लिए भेज दी। धवन ने इस रिपोर्ट को नेगटिव कर दी और जबाव लिखा कि इस टेंडर को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता क्योंकि इसको पहले से सात वर्ष के लिए एक्सटेंड किया हुआ है और अब फिर एक्सटेंड करना यह कानूनन गलत है। यह कहानी उलझी रही और इधर-उधर से दबाव चलता रहा। इसके बाद एक अन्य कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि बीकानेर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसीपल, पीबीएम के सुपरीडेंट, एफ.ए. इन सभी को मंत्रीजी जयपुर बुलाएंगे और यह सभी भिग्गी बिल्ली की तरह जाएंगे और इस फ़ाईल पर हाथ जोड़कर हस्ताक्षर करेंगे। बताया जा रहा है कि उस प्रिंसिपल ने यहाँ तक भी कहा कि जो इस टेंडर एक्सटेंड करने में रोड़ा बन रहा हैं वो अपने बिस्तर बाँध लो। इस बात को लेकर बीकानेर प्रिंसिपल और उस प्रिंसिपल के बीच में हॉट टोक भी हुई और बीकानेर प्रिंसिपल ने कहा कि मेरे बिस्तर तैयार है जहाँ भेजेंगे वहाँ ईमानदारी से काम करूँगा। यह बात मेडिकल कॉलेज व पीबीएम अस्पताल में जबरदस्त वायरल हुई। सूत्र तो यह बता रहा है कि 1 घंटे बाद चिकित्सा मंत्री जी की यहां से बीकानेर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व पीबीएम सुपरीडेंट के लिए दूसरे ही दिन जयपुर आने के लिए कह दिया गया। मंत्री जी के निर्देश के बाद सुपरीडेंट तो जयपुर चले जाते है लेकिन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य कुछ बहाना बनाकर जयपुर जाने से मना कर देते है और अपनी जगह संजय धवन को भेज देते है। यहां जयपुर की मीटिंग में अन्य कॉलेज प्राचार्य की पहले से चर्चा हो रही थी, उन्होंने महाराजा एम.आर.आई के टेण्डर प्रक्रिया को लेकर मध्यस्ता की और अंत में यह तय किया गया कि महाराजा एम.आर.आई के टेण्डर को आगे बढ़ाना है। आपको बता दें कि आरपीपीटी एक्ट के अनुसार किसी भी टेण्डर की चाहे अवधि हो या अमाउण्ट हो वन थर्ड से अधिक आगे नहीं बढ़ा सकते है। यदि टेंडर को आगे बढ़ाया जाता है तो कानूनन गलत है।

संभागीय आयुक्त के पास है एक्सटेंशन फाइल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अभी यह फाइल संभागीय आयुक्त के पास पड़ी है। संभागीय आयुक्त ने आर.एम.आर.एस के सभी सदस्यों से हस्ताक्षर करवाने के लिए अनुशंसा की है।

चहेतों को लाभ पहुंचाने के चक्कर में टेंडर को आगे बढ़ाया
महाराजा एम.आर.आई के टेण्डर के ठेकेदार राजस्थान मेडिकल यूनिवर्र्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. राजा बाबू का जंवाई बताया जा रहा है। इसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करता है। क्योंकि सरकार चाहे किसी को इस ठेकेदार की नेताओं और अफ़सरों से नजदीकियां रहती है और इसी के चलते कार्यवाही की लगाम कसने में हर कोई नाकाम है।

बीकानेर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य बनाने के लिए टास्क दी
मध्यस्ता करने वाला डॉक्टर एक मेडिकल कॉलेज का प्रिसिंपल है। जानकारी के अनुसार इस टेण्डर को एक्सटेंशन करवाने का जिम्मा इसी डॉक्टर को मिला है। बताया जा रहा है कि इस डॉक्टर को टास्क दी है कि यदि आप इस टेण्डर को एक्सटेंशन करवा दोगे तो हम आपको बीकानेर मेडिकल कॉलेज का प्रिसिंपल बनवा देंगे।

प्राचार्य व सुपरीडेंट की मिलीभगत या मजबूर ?
इस टेंडर में बीकानेर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व सुपरीडेंट की मिलीभगत है और चहेतों को लाभ पहुंचाने के चक्कर में इस टेंडर को आगे बढ़ाया जा रहा है। या प्रिसींपल या सुपरीडेंट मजबूर है ?

किस पर गिरेगी गाज
यदि इस टेंडर की जांच हुई तो एक्सटेंड करने वाली फाइल पर जिन-जिनके हस्ताक्षर हुए है, उन्ही पर ही कार्यवाही होगी। साथ ही मंत्रीजी पर कोई कार्यवाही नहीं होगी, क्योंकि मंत्रीजी का इस फाइल पर कोई हस्ताक्षर नहीं होता है।

जल्द होगा भंडाफोड
महाराजा एम.आर.आई के टेण्डर को आगे बढ़ाने वाले मामले का जल्द ही खुलासा होगा। बीकानेर के नामी आरटीआई एक्टिविस्टो द्वारा इस मामले की भंडाफोड़ करने की पूरी तैयारी कर ली है। अब देखने वाला विषय यह है कि अवैध तरीके से इस टेण्डर को आगे बढ़ाया जाता है या नहीं ?

प्रदेश के मुखिया कराएंगे इस गंभीर मामले की जांच
राजस्थान का कहा जाने वाला गांधी और ईमानदार के रूप में जाने जाना वाला प्रदेश का मुखिया अशोक गहलोत इस भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों, नेताओं और अफसरों पर कार्यवाही करेंगे ? क्या विपक्ष इस मुद्दे को उठायेगा ? क्या बीकानेर के सत्ताधारी पक्ष इस मामले में हस्तक्षेप करेंगे ?