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बीकानेर। यदि आप महिला सरपंच बनने का सपना संयोए है और आपका पीहर राजस्थान से बाहर तो यह खबर उन महिलाओं के लिये है। राजस्थान से बाहर मायके वाली सरपंच पद की दावेदार महिलाओं के लिये चुनाव लडऩे को लेकर आशंकाओं के बादल मडऱाएं हुए है। क्योंकि सरकार ने प्रदेश के बाहर की महिलाओं के जाति प्रमाण पत्र बनाने पर अघोषित रोक लगा रखी है।
प्रदेश की पंचायत राज संस्थाओं में 90 हजार 400 पंच व 9 हजार 171 सरपंच के पदों में से करीब 45 हजार 200 पंच व 4 हजार 585 सरपंच महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। लेकिन, प्रदेश के 33 में से 20 जिलों में पड़ोसी राज्य हरियाणा, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, पंजाब, मध्यप्रदेश, गुजरात की बहुओं की भरमार है। इसी वजह से उन सभी को चुनाव लडऩे के लिए जाति प्रमाण पत्र की दरकार है।
इस अड़चन के चलते चुनाव लडऩे के इच्छुक और राजनीतिक परिवारों की नींद उड़ गई है। हरियाणा, उत्तरप्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश से सटे हजारों गांव कस्बों से चुनाव लडऩे की इच्छुक महिलाओं के जाति प्रमाण पत्र नहीं बन रहे हैं। इसकी शिकायत जिला कलक्टर से लेकर सरकार तक पहुंच तो गई है लेकिन उसने कोई समाधान नहीं किया है।
20 जिलों में ये समस्या
पूरे प्रदेश में 33 में से 20 सीमावर्ती जिलों में यह समस्या है। जाति प्रमाणपत्र नहीं बनने से परेशान गादोज निवासी विजयपाल ने जिला प्रशासन को भी मामले से अवगत कराया है।
राजस्थान के सीमावर्ती हैं ये जिल
मध्यप्रदेश : झालावाड़, बारां, सवाईमाधोपुर, धौलपुर, करौली, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़ व कोटा
हरियाणा: अलवर, सीकर, भरतपुर,बीकानेर,चूरू, हनुमानगढ़ व झुंझुनूं
गुजरात : डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, सिरोही, जालौर
पंजाब : श्रीगंगानगर, हनुमानगढ