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बीकानेर। अनेक घोटालों और भ्रष्टाचार के मामलों से चर्चा में आई संभाग की सबसे बड़ी अस्पताल में भ्रष्टाचार कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ऑपरेशन प्रिंस में सामने आए साक्ष्य के बाद भी न तो सरकार और न ही पीबीएम प्रशासन ने कोई गंभीरता दिखाई। हालात ये है कि इससे घोटालों में लिप्त चिकित्सकों व स्टॉफ के हौसले इतने बुलंद हो गए कि अब यहां के चिकित्सक अस्पताल में काम करते हुए यहां के मरीजों को अपने घरों व अपने द्वारा खोली गई निजी अस्पतालों में ले जाकर इलाज करने लगे। इसके लिये वाक्यदा इन चिकित्सकों ने अपने दलाल रूपी कार्मिक पीबीएम के अनेक अनुभागों में नियुक्त करवा रखे है। जो संविदा के नाम पर अस्पताल में लगकर यहां के मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जा रहे है। ऐसा ही एक प्रकरण कैंसर चिकित्सक डॉ सुरेन्द्र बेनीवाल का प्रकाश में आया है। जिसने राजेश बेनीवाल नामक एक फार्मोसिस्ट को जॉब बेस पर बतौर काउन्सर मेडिकल कॉलेज के अधीन लगा रखा है। जिसका वेतन तो अस्पताल उठ रहा है। लेकिन राजेश बेनीवाल यहां कैंसर मरीजों की काउसलिंग डॉ सुरेन्द्र बेनीवाल की पटेल नगर स्थित अस्पताल के लिये करता है। इतना ही नहीं डॉ बेनीवाल अस्पताल में आने वाले मरीजों की थैरेपी अपने निजी अस्पताल में करने की राय भी मरीजों को देते है।
धोखाधड़ी का मामला दर्ज
आचार्य तुलसी कैंसर रिसर्च सेंटर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरेन्द्र बेनीवाल, उनके ससुर हेतराम भूकर व मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट राजेश बेनीवाल सहित अन्य के खिलाफ व्यास कॉलोनी पुलिस ने धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। सामाजिक कार्यकर्ता सुनीता दीक्षित ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर पुलिस में मामला दर्ज कराया है। इसमें वरिष्ठ चिकित्सक बेनीवाल सहित अन्य आरोपियों पर संगीन आरोप लगाए गए हैं। मामले में आरोप है कि पटेल नगर में स्थित मैसर्स चरक मेडिकल स्टोर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की दवाइयां बिना फार्मासिस्ट की उपस्थिति के डॉ. बेनीवाल के ससुर हेतराम भूकर द्वारा दी जा रही है, जबकि फार्मासिस्ट राजेश बेनीवाल ने चरक मेडिकल स्टोर में कार्यरत होने का शपथ पत्र दिया हुआ है, वह जॉब बेस पर काउंसलर के रूप में भी मेडिकल कॉलेज के अधीन कार्यरत है। मामले में आरोप लगाया गया है कि उक्त फार्मासिस्ट कैंसर अस्पताल में रहकर मरीजों को डॉ. बेनीवाल के प्राइवेट कैंसर अस्पताल में भेजने का काम करता है, जिसकी कई बार लिखित शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। यह भी आरोप है कि जब काउंसलर राजेश बेनीवाल सरकारी अस्पताल में जॉब बेस ड्यूटी कर वेतन ले रहे हैं, तो वे चरक मेडिकल स्टोर से फार्मासिस्ट कैसे हो सकते हैं। एक ही व्यक्ति के दो जगह पर काम करने को लेकर भी मामले में सवाल खड़े किए गए हैं। मामले में औषधि नियंत्रकों की ओर से चरक मेडिकल स्टोर की पूर्व में की गई जांच की रिपोर्ट संलग्र कर आरोप लगाया गया है कि जांच के दौरान कई बार चरक मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट राजेश के उपस्थित नहीं होने व भूकर द्वारा दवाइयां वितरित करने की रिपोर्ट औषधि नियंत्रकों ने दी, जिसके दस्तावेज भी संलग्र किए गए हैं। मामले में आरोप है कि पटेल नगर में मैसर्स चरक मेडिकल स्टोर में फर्जी शपथ पत्र के आधार पर अवैध तरीके से दवाइयों का बेचान, फार्मासिस्ट के मेडिकल स्टोर में नियमित कार्यरत होने व अस्पताल में फर्जी उपस्थिति दिखाकर एक ही समय में दो जगह से वेतन उठाने, डॉ. बेनीवाल से मिलीभगत कर कैंसर अस्पताल के साथ धोखाधड़ी करने सहित कई संगीन आरोप लगाए गए हैं। मामले में मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन प्रबंधन पर भी आरोप है कि उन्होंने मामले से अवगत कराने के बावजूद आंखें मूंदकर रखी।