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पिछले तीन लोकसभा चुनाव में हुए एक्जिट पोल फेल

बीकानेर। लोकसभा के अंतिम चरण के मतदान के बाद देर शाम आए एक्जिट पोल ने एक बार फिर से मोदी सरकार की वापसी का ऐलान किया है और इसके बाद देश में तेजी से राजनीतिक घटनाक्रम भी बदलने लगा है। विभिन्न चैनलों द्वारा मतगणना से पूर्व दिये गये अनुमान को लेकर चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म हो गया है।
वास्तिवकता तो 23 मई को ही सामने आएगी। परन्तु खुलासा डॉट कॉम की ओर से एक्जिट पोल के बाद की गई गणना को देखते हुए केन्द्र में सरकार गठन को लेकर खासी उठापठक होने वाली है। ऐसा इसलिए होगा क्योकि किसी भी दल या एलान्यस को पूर्ण बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। अगर इसका आंकलन इन तथ्यों के आधार पर करे तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
तमिलनाडू (39)+ केरल (20)+ आंध्रप्रदेश (42) + तेलंगाना (17) + कर्नाटक (28)+ ओडिशा (21)+ पश्चिम बंगाल (42)= 209 सीटें 
पिछली बार की बात करें तो जबरदस्त मोदी लहर के बाद भी एनडीए को केवल कर्नाटक में 17,पं बंगाल में दो तथा तमिलनाडू में 2 सीट जीती थी। तो एआईडीएम के 37 सांसदों का सहयोग मिला था। वहीं दूसरी तरफ यूपीए को इन 28 सीटों सहित डीएमके 22 सहित टीएमसी 34,बीजू जनता दल 19 सहित विपक्ष के हालात थे। ऐसे में इन राज्यों की बात करें तो इन 209 सीटों में कर्नाटक को छोड़ कही भी एनडीए की स्थिति मजबूत है। तमिलनाडू में एआईडीएम के में दो फाड होने के बाद यहां डीएमके मजबूत है। जो तमिलनाडू में पिछली बार से करीब 8 से 10 सीटें ज्यादा आएगी। परिणाम स्वरूप बीजेपी इन 209 में से 15 से 25 से अधिक सीटें नहीं जीत सकते और अगर इनको वीआरएस कांग्रेस का समर्थन या अन्य दलों का समर्थन मिलता है तो ऐसे हालात में 50 सीटें एनडीए के पक्ष में जा सकती है।
उत्तरप्रदेश – 80 सीटें
अब बात करें देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की जहां सर्वोधिक सांसद यहां से पहुंचते है। पिछली 2014 में केवल भाजपा ने यहां 73 सीटें जीतीं। क्योंकि अन्य सभी दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा।
इस बार सपा, बसपा और रालोद ने 44 प्रतिशत की संयुक्त वोट हिस्सेदारी के साथ गठबंधन किया है।
2014 में मोदी लहर के दौरान भी बीजेपी को केवल 42 प्रतिशत वोट मिले थे। उसे इस बार 20 से 25 सीटें मिल सकती हैं। यदि कांग्रेस बहुत ज्यादा जोर लगाती है तो 8 सीट में संतोष करना पड़ेगा और सपा बसपा रालोद गठबंधन को 35 से 40 सीट आएगी

राजस्थान (25) + एमपी (29)+ छत्तीसगढ़ (11) = 65 सीटें
कांग्रेस ने इन तीनों राज्यों को दिसम्बर में हुए चुनाव में भाजपा से छिना है। जहां पिछले चुनाव में कांग्रेस को के वल 3 सीट ही मिली थी। किन्तु बदले हालातों में जहां एक्जिट पोल इन तीनों राज्यों में कांग्रेस को 12 से 15 सीटें आंक रही है। अगर इन तीनों राज्यों में सरकार विरोधी लहर को ही आधार मान ले तो भी भाजपा को राजस्थान में 15-17,एम पी में 15-17 सीटें और छतीसगढ़ में 5-6 सीट पर जीत दर्ज कर सकती है। वहीं का ंग्रेस को राजस्थान में 8-10,एम पी में 10-12 व छतीसगढ़ में 6-7 सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा यहां कितना भी जोर मार ले 25-30 से अधिक सीटें हासिल नहीं करेगा भले ही वहां राज्य सरकार के खिलाफ वोट पडे।
महाराष्ट्र (48)+ गुजरात (26),पंजाब (13)+ हरियाणा (10),बिहार (40),दिल्ली (7),कश्मीर (6),उतराख ंड (5),झारखंड (14) = 169 सीटें
इन राज्यों की सीटों में दोनों ही दलों गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे है। जहां भाजपा की बात करें तो पंजाब में अकाली दल,महाराष्ट्र में शिवसेना,बिहार में नीतिश व रामविलास पासवान के साथ चुनावी समर में थी। तो कांग्रेस एनसीपी,झारखंड मुक्ति मोर्चा व राष्ट्रीय जनता दल के साथ चुनाव लड़ा। अगर पिछले चुनाव की ओर नजर डाले तो एनडीए ने इन राज्यों में अच्छा प्रदर्शन कर करीब 136 सीटें जीती थी। किन्तु अब हालात ने पलटी मारी है। क्योंकि 2014 में जेएमएम भाजपा के साथ था। पर इस चुनाव में नहीं। वहीं शिवसेना के उसके रिश्ते पिछले चुनाव की तरह मधुर नहीं है। उधर जम्मू में पीडीपी इस बार एनडीए की सहयोगी नहीं है। जो पिछले चुनाव में थी। ऐसे में पिछले बार वाला प्रदर्शन दोहरा पाना ढेडी खीर होगा। यहां जहां कांग्रेस को महाराष्ट्र में पिछले चुनाव के मुकाबले इस चुनाव में 10-15,बिहार में 8-10,झारखंड में 10-12,हरियाणा में 3-4,दिल्ली में 2-3,उत्तराखंड में 1-2,पंजाब में 9-10,कश्मीर में 2-3 सीटे जीत सकती है। यानि एनडीए को यहां भी 36-40 सीटों का नुकसान हो रहा है।
असम (14)+ गोवा (2),सिक्किम (1), मिजोरम (1),त्रिपुरा (2),मेघालय (2),मणिपुर (2),अरुणाचल प्रदेश (2)
अब पूर्वात्तर में क्षेत्रिय दल मजबूत,कांग्रेस के हालात सुधरे। यहां पिछली दफा एनडीए को आधी सीटें मिली थी। किन्तु इस बार इसमें सैंधमारी हुई है।