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– मोहन थानवी
कोरोना काल और राजनीति की चौसर पर खींचतान… दोनों स्थितियां पहली बार, और वो भी राजस्थान में। जी हां। हम राजस्थान की ही राजनीति और यहां कोरोना की एडवाइजरी की ही बात कर रहे हैं। राजस्थान से पहले विभिन्न राज्यों में जो कुछ हुआ, कथित रूप से हुआ, उसकी बात हम नहीं कर रहे। राजस्थान में जो हो रहा है वह सब जनता के सामने है। राजस्थान के जनप्रतिनिधि अपने आप को एकजुट बताते हुए राजभवन में जा बैठे हैं लेकिन वह एक ही दल के हैं। दूसरी ओर इसी दल के कुछ विधायक कुछ दिन पहले ही अपने डंके की चोट गुंजायमान कर चुके हैं। जनता तो अपने कीमती वोट दम के तहत होती कार्यवाही ही देख रही है। दूसरी ओर, कोरोना काल में एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से उल्लेख है 2 गज की दूरी का और सामूहिक रूप से कोई भी आयोजन समारोह ना करने का। लेकिन राजस्थान की जनता देख रही है कि क्या हो रहा है। ना कोरोना पर किसी का बस है और ना ही राजनीति पर किसी का बस है। सत्तासीन दल अपने आप को कभी बैकफुट पर पाता कभी फ्रंट फुट पर लेकिन है तो वह सत्तासीन। इस बात को जनता जानती है। लगता है जिन नेता ओं को चुना गया है जनता के द्वारा वह जनता की भावना को नहीं समझ रहे।