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साहित्य अकादमी की वेबलाइन सीरीज में बिजारणियां सहित युवाओं का रचना पाठ
लूणकरणसर। ‘नक्सै सूं मिटता गिया नांव, म्हारा गांव बणग्या हिरोशिमा अर नागासाकी!’ और ‘नक्से में कठै हुवै गांव, नक्से में तो हुवै फकत एक दूसरे नै काटती झ्योड़ी लकीरां!’ युवा साहित्यकार राजूराम बिजारणियां ने विस्थापन का दर्द बयां करती ये कविताएं सुनाई तो पैंतीस वर्ष पुराना चौंतीस गांवों के उठने का मंजर आँखों के सामने आ खड़ा हुआ। साहित्य अकादमी, नई दिल्ली की वेबलाइन साहित्य श्रृंखला में राजस्थानी के युवा रचनाकारों ने ‘युवा साहिती’ के तहत अपना रचना पाठ किया। अकादमी में राजस्थानी भाषा के प्रभारी ज्योतिकृष्ण वर्मा ने बताया कि इस आयोजन में राजूराम बिजारणियां लूणकरणसर, राम लखारा विपुल, बाड़मेर और सुधा सारस्वत, बीकानेर ने रचनाओं की प्रस्तुति दी। बिजारणियां ने महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के कारण उझड़ें गांवों की दारुण व्यथा अपनी कविताओं के बहाने सामने रखी वहीं अपना प्रतिनिधि गीत ‘छाँव सरीखी बेटी’ भी सुनाया।लखारा ने समसामयिक गीत सुनाया। सुधा ने मानवीय संबंधों के बिखराव को अभिव्यक्त करती कहानी सुनाई।आयोजन के अंत में अकादमी में राजस्थानी भाषा के संयोजक मधु आचार्य ‘आशावादी ‘ ने कहा कि युवा रचनाकारों की कविता और कहानी राजस्थानी साहित्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए भरोसा दिलाती है। उन्होंने कहा राजस्थानी का युवा साहित्य दूसरी भाषाओं के बराबर खड़ा है। ज्योतिकृष्ण वर्मा ने बताया कि कोरोना काल में अकादमी वेबलाइन साहित्य सीरीज के माध्यम से पाठकों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। रचनाकारों ने अकादमी और सचिव के श्रीनिवास राव का आभार जताया।