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बीकानेर। निजी स्कूलों में फीस एक्ट के मामले को लेकर हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को झटका दिया है, हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की याचिका को खारिज कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा बनाए गए फीस एक्ट को निजी स्कूलों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस एक्ट पर रोक लगा दी थी। सालों से निजी स्कूलों की मनमानी से अब प्रदेश के हजारों अभिभावकों को राहत मिलेगी। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की मजबूत पैरवी के चलते राजस्थान विद्यालय फीस का विनियमन एक्ट-2016 को सही ठहराया है जिसके बाद प्रदेशभर के निजी स्कूल ना तो मनमाने रूप से फीस वसूल सकेंगे और ना ही बच्चों पर अतिरिक्त बुक्स और खर्चों का भार डाल सकेंगे। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेशभर के अभिभावकों में खुशी की लहर है। उल्लेखनीय है कि चाहे भाजपा सरकार हो या कांग्रेस सरकार हो, हर सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी रोकने और अभिभावकों को राहत देने की कई योजना बनाई। इसी कड़ी में पिछली बीजेपी सरकार ने वर्ष 2016 में निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए विनियमन एक्ट-2016 लागू किया था जिसके बाद प्रदेशभर की करीब 35 हजार स्कूलों पर कार्रवाई का अधिकार राज्य सरकार को था। निजी स्कूलों ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी और उसके बाद हाईकोर्ट ने इस एक्ट पर रोक लगा दी थी। सरकार द्वारा बनाए गए फीस एक्ट को निजी स्कूलों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस एक्ट पर रोक लगा दी थी, लेकिन सवा साल सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसले देते हुए निजी स्कूलों की याचिका को खारिज करने का आदेश सुनाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पेरेंट्स वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष दिनेश कांवट ने कहा कि ये प्रदेशभर के अभिभावकों को राहत देने वाला आदेश है। निजी स्कूलों की मनमानी के चलते अभिभावकों पर काफी ज्यादा आर्थिक भार आ गया था। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वर्ष 2016 में पिछली बीजेपी सरकार ने एक्ट लागू किया था लेकिन ये एक्ट वर्ष 2017 में हाईकोर्ट में अटक गया। पिछली बीजेपी सरकार की उदासीनता के चलते पिछले दो सालों से ये मामला कोर्ट में अटका रहा वहीं वर्तमान कांग्रेस सरकार ने मजबूती से पक्ष रखा और आज फैसला अभिभावकों के हक में आया है। इस एक्ट से अब निजी स्कूलों पर तो लगाम लगेगी ही साथ ही मनमानी करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों की मनमानी रुक नहीं रही थी जिसके चलते ना सिर्फ आर्थिक भार बढ़ रहा था साथ ही घर का बजट भी बिगड़ रहा था। फीस और पुस्तकों के अलावा आए दिन किसी ने किसी बहाने के पैसों की वसूली भी स्कूलों द्वारा की जाती थी जिसके चलते काफी परेशानी होती थी। बहरहाल, प्रदेश के सैंकड़ों अभिभावकों को जहां हाईकोर्ट के फैसले के बाद राहत मिली है तो वहीं दूसरी ओर 35 हजार निजी स्कूलों के लिए एक्ट की पालना करना भी जरुरी होगा जबकि ऐसा नहीं करने पर अब सरकार को इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार भी रहेगा।