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जयपुर। राजस्थान में सरकार के क्वारंटीन होने से ब्यूरोक्रेसी में असमंजस की स्थिति है। सरकार रहेगी या गिरेगी इसको लेकर भी अधिकारियों को संदेह है। इस राजनीतिक अनिश्चितता के कारण अधिकारी भी फैसला लेने से डर रहे है। स्थिति ये है कि मुख्य सचिव और अन्य अधिकारी रोजोना के जरूर काम के अलावा कोई बड़ा फैसला नहीं ले पा रहे है। सरकार के आदेशों और निर्देशों के इंतजार में ब्यूरोक्रेसी चुपचाप बैठी है। इस असमंजस की स्थिति में फाइलों का मूवमेंट नहीं हो रहा है। कई बड़े मामले सरकार के स्तर पर पेंडिग चल रहे हैं। इनमें राज्य की जेलों में सुधार के नवाचार और थर्ड जेंडर को अलग से पहचान-पत्र मुहैया कराने समेत बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन के कई काम बाकी हैं।
एक तरफ कोरोना काल वहीं सरकार पर संकट, इस बीच निकायों से लेकर पंचायतों के चुनाव भी पेंडिंग है। सरकार स्थिर हो तो कोई फैसला लेकर चुनाव नहीं तो विकास कार्यों को गति दे सकती है। लेकिन विधायक और मंत्री ही बाड़ाबंदी में कैद है तो कार्यों के बारें में कौन सोचे। क्योकि अधिकारी मंत्रियों की अनुमति के बिना फाइलों को सरकाने का काम नहीं कर रहे है।सरकार बचेगी या गिरेगी इसको लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। लेकिन अफसर इतनी दुविधा में हैं कि किसकी सुनें और किसकी नहीं। उन्हें डर है कि आज कांग्रेस सत्ता में हैं और कल बीजेपी सत्ता में आ गई तो क्या होगा? राज्य में सत्ता बदलने के साथ ही ब्यूरोक्रेसी को बदलने की पुरानी रवायत रही है। इन सबको लेकर शासन सचिवालय में सन्नाटा पसरा हुआ है।