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बीकानेर। खनिज सम्पदा में मालामाल, फिर भी कंगाल जैसी स्थिति श्रीकोलायत विधानसभा क्षेत्र की है। उस पर दो माह पहले डिस्ट्रीक्ट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट (डीएमएफसी )के बदले अध्यक्ष पद ने घाव में घोंबा दिया है। जबकि खनिज सम्पदा के मामले में बीकानेर जिले में पहले नम्बर पर श्रीकोलायत का नाम आता है। इसके बावजूद डीएमएफसी के अन्तर्गत खर्च होने वाली राशि श्रीकोलायत में खर्च न होकर बीकानेर में खर्च की जा रही है। जिसको लेकर श्रीकोलायत विधानसभा क्षेत्र के लोगों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों में खासा रोष व्याप्त है। दिलचस्प बात तो ये है कि बीकानेर में एक केन्द्रीय व दो प्रदेश के मंत्री होने के बावजूद इस मामले में कोई नहीं बोल रहा है।
डीएमएफसी के नियम
जबकि डिस्ट्रीक्ट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट के नियम ये है कि जहां खनिज सम्पदा का खनन होता है। उसकी दस प्रतिशत राशि का वहीं पर विकास के नाम पर खर्च होनी चाहिए। जबकि डीएफएफसी के अध्यक्ष बदलने के बाद उक्त राशि को खर्च खर्च करने में मनमानी हो रही है। जबकि यह राशि श्रीकोलायत में खर्च होनी चाहिए थी। इसके स्थान पर इस राशि को बीकानेर की सेटेलाइट हॉस्पीटल में खर्च किया जा रहा है।
बीकानेर जिले में यदि खनिज सम्पदा की बात करें तो सर्वाधिक खनिज सम्पदा श्रीकोलायत विधानसभा क्षेत्र में है। बताया जाता है कि बीकानेर जिले की खनिज सम्पदा में अकेले श्रीकोलायत से 80 प्रतिशत खनिज सम्पदा निकल रही है। चाहे भले वह जिप्सम हो, बजरी हो या फिर कोयला। खनिज विभाग की माने तो वर्ष 2019-20 के लिए 130 करोड़ के राजस्व का लक्ष्य रखा गया है। पिछले वर्ष खनिज विभाग को खनिज सम्पदा से लगभग 105 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। डिस्ट्रीक्ट मिलरल फाउण्डेशन ट्रस्ट (डीएमएफसी) के अन्तर्गत कुल राजस्व राशि का दस प्रतिशत हिस्सा उसी क्षेत्र में विकास कार्यों में लगाना होता है। उसके हिसाब से डीएफएफसी की राशि लगभग 13 करोड़ रुपए बनती है।
2 माह पहले बदला अध्यक्ष
डिस्ट्रीक्ट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट के दो माह पहले तक अध्यक्ष जिला प्रमुख सुशीला सींवर थी। किंतु दो माह पहले इसमें परिवर्तन करते हुए अब इसके अध्यक्ष जिला कलक्टर है। दिलचस्प बात तो ये है कि खनिज सम्पदा के लिए सर्वाधिक राजस्व श्रीकोलायत क्षेत्र से मिल रहा है। इसके बावजूद डीएमएफसी में स्थानीय जनप्रतिनिधियों या लोगों की कोई भूमिका नहीं है। डीएमएफसी के अध्यक्ष उक्त राशि को अपने हिसाब से खर्च कर रहे है।
अवैध खनन, फिर भी इस राशि पर फोकस अधिक
खनिज विभाग व जिला प्रशासन बीकानेर जिले में खनिज सम्पदा के चल रहे अवैध खनन एवं अवैध परिवहन के खेल से कहीं अधिक डीएफएफसी राशि के अन्तर्गत खर्च होने वाली राशि पर अधिक ध्यान केन्द्रित है। जबकि सालाना अवैध खनन से करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान प्रदेश की सरकार को उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद अवैध खनन व अवैध खनिज परिवहन के नाम पर विभाग को आवंटित होने वाले लक्ष्य की पालना में छोटी-छोटी कार्रवाई की जा रही है। जबकि सीमांत क्षेत्र में अवैध खनन के चलते माफियाओं ने सड़कों व आबादी क्षेत्र तक को नहीं बख्शा है। मगर उन पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
नेता व अधिकारी है मौन
श्रीकोलायत क्षेत्र में निकलने वाली खनिज सम्पदा से होने वाली राजस्व की दस प्रतिशत राशि डीएमएफसी के अन्तर्गत खर्च होने वाली करोड़ों रुपए की राशि के चल रहे इस खेल को लेकर न तो नेता बोल रहे और न ही अधिकारी। जिसका खमियाजा श्रीकोलायत क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यदि डीएफएफसी के अन्तर्गत खर्च होने वाली राशि श्रीकोलायत क्षेत्र में खर्च हो तो वहां रहने वाले लोगों को काफी हद तक राहत मिलेगी।
क्षेत्र में डीएमएफसी की राशि खर्च होनी चाहिए
डीएमएफसी के अन्तर्गत खनिज सम्पदा से होने वाली आय का 10 प्रतिशत हिस्सा राशि श्रीकोलायत क्षेत्र में खर्च नहीं हो रही है। जो कि नियमों के खिलाफ है। देवीसिंह भाटी, सरपंच, श्रीकोलायत
अवैध खनन की शिकायत
उधर ग्राम पंचायत भूरासर निवासी राजे खां ने बज्जू थानाधिकारी को एक ज्ञापन देकर भूरासर क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायत की है। उन्होंने कहा कि भूमाफिया बेखौफ होकर ओरण भूमि में पिछले चार पांच माह से जेसीबी मशीन से जिप्सम निकालकर फैक्ट्रियों का सप्लाई कर रहे है। इससे राजस्व का नुकसान हो रहा है। इस बारे में भूमाफियों को अनेक बार आगाह भी किया किन्तु वे झगड़े पर उतारू हो जाते है।