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बीकानेर। वैसे तो चौकीदार शब्द कोई नया नहीं है। लोकसभा चुनाव में इस शब्द का जितना प्रयोग हुआ है। शायद सरकार का एक महत्वपूर्ण महकमा इससे प्रभावित हो गया और उन्होंने इस शब्द की वास्तविक क्रि यान्विती में लग गया। कुछ ऐसा ही माजरा 26 मई को आयोजित होने वाली प्री बीएसटीसी प्रवेश परीक्षा में देखने को मिल सकता है। जिसके लिये पदेन जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा अभियान बीकानेर ने एक आदेश निकालकर निजी शिक्षण संस्था के प्रधानों को चौकीदार बना दिया है। इस आदेश में जिन निजी स्कूल व कॉलेज में यह परीक्षा आयोजित होगी। उसके संस्था प्रधानों का जिम्मा परीक्षा केन्द्रों पर पानी-बिजली की व्यवस्था मुहैया करवाने का रहेगा। इन परीक्षा केन्द्रों की परीक्षा संचालन समिति की समस्त जिम्मेदारी परीक्षा एजेन्सी की ओर से नियुक्त सरकारी अध्यापकों की होगी। ऐसे में निजी शिक्षण संस्थाओं की परीक्षा आयोजित करवाने की कार्यशैली पर सीधा सीधा सवालिया निशान भी है।
नकल रोकने का तर्क बेमानी
बताया जा रहा है कि परीक्षा एजेन्सी करवाने वाली एजेन्सी इस बात का तर्क दे रही है कि नकल रोकने के लिये इस प्रकार का प्रावधान किया गया है। जबकि ऐसा करने से नकल पर अंकुश नहीं लग पाएगा। इस बात का अंदेशा परीक्षा करवाने वाले विभाग को भी है। हालात ये है कि हाल ही में सम्पन्न प्री बीएड परीक्षा भी सैकड़ों निजी स्कूल व कॉलेजों में हुई थी। जिसमें प्रदेशभर में महज एक प्रकरण बालोतरा में सामने आया। इससे साफ जाहिर है कि चाहे सरकारी हो या निजी शिक्षण संस्थाएं परीक्षा आयोजित करवाने में कितनी गंभीर है। इसके लिये चाहे वीक्षक या केन्द्राधीक्षक सरकार ही हो या निजी शिक्षण संस्थाओं के संस्था प्रधान।
प्रतियोगी परीक्षाएं तक होती है,नहीं आती शिकायतें
गौर करने वाली बात तो ये है कि प्री बीएसटीसी परीक्षा पूर्व में निजी शिक्षण संस्थाओं में होती आई है। परन्तु इस दफा पदेन जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा अभियान के इस तुगलकी आदेश ने निजी शिक्षण स ंस्थाओं की परीक्षा करवाने की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिये। जबकि विभाग को इसकी भी पुख्ता जानकारी है कि अहम प्रतियोगी परीक्षाएं भी निजी शिक्षण संस्थाओं में पहले होती आई है और जब से प्रतियोगी परीक्षाओं व अन्य सामान्य परीक्षाओं में तय ड्रेस कोड व मापदंड़ों के बाद नकल पर वैसे ही नकेल क स गई है। ऐसे में परीक्षा एजेन्सी का यह तर्क की ये नकल को रोकने के लिये किया गया है। बेमानी सा लगता है।
आदेशों का हो चुका है विरोध
पदेन जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा अभियान की ओर 25 अप्रेल को निकाल गए इस आदेश का निजी शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने विरोध किया और जिला समन्वयक का घेराव कर खरी खरी भी सुना दी थी। जिसके बाद परीक्षा एजेन्सी ने सरकार को इस बाबत मार्गदर्शन भी मांगा है। यहीं नहीं कुछ निजी शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने अपने यहां परीक्षा करवाने से भी मना कर दिया है।