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अपने ही निरीक्षकों पर विभाग को नहीं भरोसा
आवेदनों की जयपुर में हो रही जांच
बीकानेर।
विगत कुछ सालों में श्रम निरीक्षकों की लापरवाही से बढ़ी फर्जी निर्माण श्रमिकों की संख्या के बाद अब विभाग को अपने ही निरीक्षकों पर विश्वास नहीं है। विभाग के अधीन सबसे अधिक आवेदन शिक्षा एवं कौशल विकास योजना के अंतर्गत आते हैं, जिनकी जांच अब जयपुर में बैठे कार्मिकों से करवाई जा रही है। इतना ही नहीं जांच करने के बाद आवेदनों को फिजिकल वैरीफिकेशन के लिए अटकाया जा रहा है। विगत एक सप्ताह से चल रही इस व्यवस्था को लेकर श्रम निरीक्षकों का कहना है कि उनके पास निर्माण सेस का बड़ा लक्ष्य है। इसके अलावा अन्य योजनाओं के आवेदनों की जांच व जयपुर से फिजिकल वैरीफिकेशन के लिए आने वाले आवेदनों का सत्यापन भी करना पड़ता है। ऐसे में यदि हजारों आवेदनों की जांच जयपुर से हो रही है, तो उनके लिए राहतकारी है।
श्रम विभाग के बीकानेर जिले में एक लाख से अधिक पंजीकृत निर्माण श्रमिक है। विभाग का मानना है कि इनमें से 50 फीसदी श्रमिक फर्जी है, जो मजदूर तो हैं, लेकिन निर्माण कार्य से जुड़े हुए नहीं है। ऐसे में उन्हें योजना के अंतर्गत पात्र नहीं माना जा सकता। प्रतिवर्ष पंजीकृत श्रमिक छठी कक्षा से ऊपर अध्ययनरत अपने दो बच्चों का शिक्षा एवं कौशल विकास योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकता है, जिसमें आठ से 25 हजार रुपए तक सहायता राशि मिलती है। एक अनुमान के अनुसार यदि 25 फीसदी श्रमिक भी प्रतिवर्ष आवेदन करते हैं, तो विभाग के पास इस योजना के पचास हजार आवेदन पहुंचते हैं, जिन्हें योजना के तहत कम से कम चालीस करोड़ रुपए का भुगतान करना होता है।
सभी श्रमिक संदेह के दायरे में
श्रम विभाग विगत तीन माह से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को शक की नजर से देख रहा है। यही कारण है कि प्रत्येक नियोजक प्रमाण-पत्र का मौका निरीक्षण कर कमियां निकाली जाती है और फिर आवेदन निरस्त कर दिया जाता है। इतना ही नहीं ऐसे दर्जनों नियोजक है, जिन्हें बिना वजह निर्माण सेस जमा कराने के नोटिस जारी कर दिए गए।
नहीं शुरू हुई आवेदन प्रक्रिया
गत दिनों श्रम विभाग ने नए श्रमिक पंजीकरण पर प्रदेशभर में एकबारगी रोक लगा दी थी, हंगामा होने पर 24 घंटे बाद ही तकनीकी खराबी बताकर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई लेकिन शिक्षा एवं कौशल विकास योजना के तहत सत्र 2018-19 में उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इससे श्रमिक परेशान हो रहे हैं।
पारदर्शिता से होगा कार्य
पूर्व में पंचायत समितियों की ओर से शिक्षा एवं कौशल विकास, शुभशक्ति व अन्य योजनाओं के आवेदनों की जांच की जाती थी। अब सभी कार्य श्रम विभाग के माध्यम से किए जा रहे हैं। शिक्षा एवं कौशल विकास योजना के आवेदनों की जांच का कार्य चल रहा है। इससे कार्य में और अधिक पारदर्शिता आएगी।

  • अब्दुल सलाम काजी, श्रम कल्याण अधिकारी, श्रम विभाग, बीकानेर।