प्रतापगढ़। ऐसे तो सरकार लोक अदालतों के जरिये न्यायपालिका में लंबित पड़े प्ररकर्णो के निस्तारण का दावा कर रही है। वही दूसरी ओर सरकारी लेटलतीफी के चलते अनेक विभागों में चयनित अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। इसमे पंचायतीराज विभाग के ढुलमुल रवैया का खामियाजा हजारो बेरोजगारों को भोगना पड़ रहा है। अभी तक १९९९ मे चयनित प्रकरण का निस्तारण हुआ भी नही कि जिला परिषद की ओर से तृतीय भर्ती परीक्षा २०१३ के चयनितों को कोर्ट के आदेश के बाद भी नियुक्ति नही दी जा रही। मजबूरन चयनितों ने कोर्ट में वाद दायर कर गुहार भी लगाई। पर पंचायतीराज ने पिछले १० महीनों में कोर्ट के नोटिस तक का जबाब देना उचित नही समझा। हालत ये है कि सरकार की ओर से चयनितों की ओर से दायर वाद की पैरवी करने के लिए अधिवक्ता तक नियुक नही किया है।
११ महीने पहले दायर है वाद
मजे की बात यह है कि ११ महीने पहले प्रतापगढ़ निवासी बाबूलाल तेली ने २७ मार्च २०१९ को राजस्थान उच्च न्यायालय में वाद ४७०३/२०१९ दायर कर तृतीय श्रेणी भर्ती परीक्षा २०१३ के हिंदी विषय मे चयनितों को नियुक्ति देने की कोर्ट से गुहार लगाई। जिस पर न्यायाधिपति ने २ अप्रेल को जिला परिषद प्रतापगढ़ को नोटिस भेज प्ररकण से सन्दर्भ में जबाब मांगा। किंतु अब तक न तो जिला परिषद की ओर से कोई जबाब दिया गया और न ही चयनितों को संतोषजनक उत्तर।
इस तरह प्रकरणों के लंबित होने से चयनित उम्रदराज होते जा रहे। किंतु सरकार की ओर से ऐसे प्रकरणों को निस्तारित करने में दिलचस्पी न दिखाने से चयनितों का मनोबल टूटता जा रहा है।