जयपुर। राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए अच्छी खबर है। गहलोत सरकार मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान के बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरियों में अधिक से अधिक प्राथमिकता देने की तैयारी कर रही है। इसे लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को कार्मिक, प्रशासनिक सुधार, विधि सहित अन्य विभागों के आला अफसरों को इस पूरे मामले का परीक्षण करने के निर्देश दिए, ताकि राज्य के युवाओं के लिए अधिक से अधिक अवसर पैदा किए जा सकें।
सूत्रों के अनुसार सीएम ने यहां तक कहा कि यदि दूसरे राज्य अपने युवाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं तो राजस्थान ऐसा क्यों नहीं कर सकता। सूत्रों के अनुसार सीएम अशोक गहलोत राज्य के बेरोजगार युवाओं को लेकर खासे चिंतित हैं। इसी को ध्यान में रखकर उनकी ओर से यह कदम उठाया जा रहा है।
पिछले महीने ही मध्य प्रदेश सरकार ने फैसला किया था कि सरकारी भर्तियों में केवल मध्य प्रदेश के युवाओं को ही तरजीह देंगे। इसी के बाद यह मामला गरमा गया था कि राजस्थान में भी स्थानीय युवाओं को ही प्राथमिकता दी जाए।
प्रदेश में यह मुद्दा कई वर्षों से चल रहा है कि यहां भर्तियों में स्थानीय युवाओं को ही प्राथमिकता दी जाए। प्रदेश में कई तरह की भर्तियां ऐसी हैं, जहां 100त्न स्थानीय युवाओं को ही प्राथमिकता दिए जाने की जरूरत है। इनमें पटवारी, तृतीय श्रेणी शिक्षक, पशुधन सहायक, कृषि पर्यवेक्षक, महिला पर्यवेक्षक आंगनबाड़ी, पूर्व प्राथमिक शिक्षक और लिपिक जैसी कई भर्तियां हैं, जहां बाहरी युवाओं के मुकाबले स्थानीय युवा अच्छे से और बहुत बेहतर गुणवत्ता के साथ काम कर सकते हैं।
स्थानीय उम्मीदवार होने के कई फायदे
पटवारी के किसानों से संबंधित काम होते हैं। जमीन को नापने के लिए जो पैरामीटर होते हैं उन्हें स्थानीय व्यक्ति ही आसानी से समझ सकता है। 6इसी तरह ग्राम विकास अधिकारी लोगों को सरकार की व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं की जानकारी देता है। इसके लिए जरूरी है कि उसे स्थानीय भाषा आनी चाहिए ताकि वह लोगों को आसानी से समझा सके। ऐसे में स्थानीय होने पर ये काम आसानी से किए जाते हैं।