जोनल टास्क फोर्स वर्कशॉप(वेस्ट जोन)2020
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम
बीकानेर। पूरे विश्व का 27 प्रतिशत टी बी का भार भारत पर है जो निश्चित तौर पर चिंता का विषय है। राज्य सरकार इसके उन्मूलन के लिए हर संभव प्रयास करेगी और जनजागरूकता का कार्य उच्च शिक्षा विभाग द्वारा किया जाएगा। यह उद्गार उच्च शिक्षा मंत्री राज्य सरकार भंवरसिंह भाटी ने गुरुवार को होटल राज विलास में व्यक्त किये। जोनल टास्क फोर्स वर्कशॉप(वेस्ट जोन) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पर संपूर्ण नियंत्रण का प्रयास कर रही है। इसके लिए आर्थिक सहायता के साथ जनजागरूकता फैलाने और दवाओं तथा जांच को नि:शुल्क कर जनता को लाभान्वित कर रही है। उच्च शिक्षा मंत्री भाटी ने कहा कि चिकित्सकों का टी बी उन्मूलन के लिए चलाया जा रहा अभियान संपूर्ण देश का अभियान बनना चाहिए।  जोनल टास्क फोर्स के आयोजन सचिव राजस्थान एवं एसपी मेडिकल कॉलेज के श्वसन रोग आचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ. गुंजन सोनी ने बताया कि कार्यशाला में वरिष्ठ टी बी रोग विशेषज्ञ एवं कई शोद्य कर चुके तथा पुस्तकें प्रकाशित कर चुके डॉ. डी बेहरा ने इसकी रोकथाम को लेकर आवश्यक तथ्यों से अवगत कराया। कार्यशाला में डॉ. गुंजन सोनी, डॉ. सुदर्शन मण्डल, डॉ. संजीव कृष्णा, डॉ. एच.एस. कुमार, डॉ. सलील भार्गव, विनोद गर्ग ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराया। कार्यक्रम में उपस्थित ना होने के कारण कला एवं जलदाय मंत्री राजस्थान सरकार डॉ. बी.डी. कल्ला ने वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से कार्यशाला के सफल संचालन को लेकर सभी को शुभकामनाएं दी तथा टी बी रोग उन्मूलन के लिए जनजागरुकता के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन किशोरसिंह राजपुरोहित द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापित डॉ. सी.एस. मोदी ने किया। कार्यक्रम का आरम्भ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन से हुआ। कार्यशाला में गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश के 150 मेडिकल शिक्षक, भारत सरकार के प्रतिनिधि, नेशनल टास्क फोर्स एवं अन्य जोनल टास्क फोर्स के प्रतिनिधिगण एवं राष्ट्रीय संस्थानों(एनटीआई बेंगलूरु,एनआईटीआरडी दिल्ली)के प्रतिनिधि और डब्ल्यूएचओ आरएनटीसीपी कन्सलटेन्टस ने भाग लिया। डॉ. गुंजन सोनी ने बताया कि कार्यशाला में डॉ.श्रीमती राधा मुंजे, डॉ. माणक गुजरानी,डॉ. राजेन्द्र सौगत, डॉ. अजय श्रीवास्तव, डॉ. प्रमोद ठकराल आदि ने भी विचार रखे।