दौसा: वैसे तो इंसान को जीते जी शकून नहीं मिलता लेकिन अब शमशान व कब्रिस्तान के अभाव में मरे हुए लोगों को भी सकून नसीब नहीं होता. दौसा में मुर्दों को उन के सहसम्मान अ़तिम संस्कार में कब्रिस्तान व शमशान का अभाव रोडा बना हुआ है. दर्जनों गांव ऐसे है जहां शमशान या कब्रिस्तान चिन्हित ही नहीं है. मौत के मातम से परेशान परिजनों को अपनों का अ़तिम संस्कार चुनौती बन जाता है. लोगों को खेतों के बीच शव जलाने पडते है तो घर के आंगन में लाश दफन करने की मजबूरी है.

 

दौसा जिले में आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां श्मशान घाट और कब्रिस्तान को लेकर विवाद गहरा जाते हैं. कहीं पर गांव में श्मशान घाट ही नहीं है तो कहीं पर कब्रिस्तान नहीं होने के चलते शवों के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ता है. उसके बावजूद भी जब कोई समाधान नहीं होता तो उन्हें अपने खेतों में या फिर अपने भूखंडों में ही शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ता है. हाल ही में दौसा के सदर थाना क्षेत्र के चेना का बास की महिला की मौत के बाद परिजन महिला के अंतिम संस्कार के लिए शव को लेकर श्मशान घाट पहुंचे तो कुशाला के बास के गांव के लोगों ने उन्हें अपने श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया.

सूचना पर पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे समझाइश का दौर शुरू हुआ. 20 घंटे तक पुलिस प्रशासन के अधिकारी समझाइश करते रहे लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ. आखिरकार मृतका के परिजनों को दूसरे दिन अपने ही खेत में मृतका का प्रभाती देवी का अंतिम संस्कार करना पड़ा. दौसा जिले में कोई एक नहीं बल्कि कई दर्जन ऐसे मामले है जहां शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार नहीं हो पाया.

1. महुवा में कब्रिस्तान के अभाव में मुस्लिम समुदाय के लोगों आज भी शव को अपने भूखंडों में कब्रिस्तान के रुप में शवों को दफनाने के काम लिया जाता है.

2. मुस्लिम समुदाय की तरह जोगी नाथ समाज में मुर्दे को समाधी देकर गाढने की परिपाटी है. जिले में ज्यादातर ऐसे गांवों में विवाद बना हुआ है जहां नाथ समाज के लोग रहते है. हाल में बसवा के पास एक गांव में शव समाधी के लिए कई घंटो तक रखा रहा.

3. महुवा में मुस्लिम समाज के लोगों को कब्रिस्तान के लिए भुमि आवंटित की लेकिन प्रशासन शहदपुर गांव में इस आवंटित कब्रिस्तान भुमि पर कब्जा नहीं दिला पाया. जिले में श्मशान घाट और कब्रिस्तान के अभाव को लेकर हमने दौसा के महुआ से विधायक ओमप्रकाश हुडला से बात की तो उनका कहना है कि जहां भी इस तरीके की समस्या आएगी उसके लिए जिला कलेक्टर के साथ चर्चा करके इन समस्याओं का निराकरण करवाया जाएगा वहीं जहां जमीन का विवाद है या रास्ते का विवाद है तो उन समस्याओं का भी हल किया जाएगा और जहां शमशान घाट नहीं है. उन गांवों में चरागाह भूमि में से श्मशान घाट आवंटित करवाए जाएंगे जिससे भविष्य में इस तरह की समस्याएं सामने ना आए और शवों का सह सम्मान अंतिम संस्कार हो सके.

दौसा जिले के ग्रामीण इलाकों में श्मशान घाट और कब्रिस्तान के विवाद ना आए और उनका समाधान हो इसको लेकर हमने दौसा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लक्ष्मीकांत बालोत से बात की तो उनका कहना है कि सरकार ने श्मशान और कब्रिस्तान चिन्हित करने व उन को विकसित करने के लिए नरेगा के तहत प्रावधान कर रखे हैं जिसके चलते हम अब तक 100 से अधिक सौ से अधिक शमशान घाट का कार्य करवा चुके हैं रास्तों से संबंधित विवाद नियम के तहत होने पर कानूनन हल किए जाते हैं और रास्ता नहीं होने की स्थिति में दोनों पक्षों को बैठाकर समझाइश कि जाती है. वहीं, जहां श्मशान घाट नहीं है वहां सरकारी भूमि से श्मशान घाट आवंटित करने का भी प्रावधान है.