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बीकानेर/श्रीगंगानगर. श्रीगंगानगर की जिला जेल से पैरोल पर फरार हुए कुख्यात हथियार तस्कर एवं प्रदेश के टॉप-25 में हार्डकोर अपराधी मोहम्मद आमीन को पुलिस और एसओजी मिलकर भी अब तक ढूंढ नहीं पाई है। बीकानेर संभाग की श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू और बीकानेर पुलिस के साथ-साथ राज्य की एसओजी भी उसकी धरपकड़ करने में लगी है लेकिन उसका साढ़े चार महीने बाद भी सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि मेडिकल पीबीएम अस्पताल के चिकित्सक से बनवाया गया था।जांच अधिकारी लाल बहादूर ने बताया कि आरोपी वसीम अकरम कुख्यात बंदी मोहम्मद आमीन का भतीजा है और उसने ही फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाया था। वसीम ने बंदी आमीन की के बेटे अली अब्बास की किडनी खराब बताकर बीकानेर जिला कलक्ट्रेट में उपचार कराने के नाम पर सात दिन की आपात पैरोल मांगी थी। आमीन की पत्नी मेहरुनिशां ने बालक अली अब्बास को आमीन का बेटा बताने के संबंध में दस्तावेज भी तैयार करवाए थे। इस आधार पर बीकानेर कलक्ट्रेट से 20 से 26 फरवरी 2019 तक सात दिन की पैरोल हासिल कर ली। पैरोल पर बाहर लाने के लिए बीकानेर निवासी देवेन्द्र भाटी ने जमानती की भूमिका निभाई थी। 26 फरवरी की शाम पांच बजे मोहम्मद आमीन को वापस श्रीगंगानगर केन्द्रीय कारागृह में आना था लेकिन वह नहीं आया तो उसी दिन शाम को जेल प्रशासन की ओर से कोतवाली में फरार होने का मामला दर्ज कराया गया थाअब तक तीन गिरफ्तार श्रीगंगानगर की कोतवाली पुलिस ने इस मामले में अब तक बंदी मोहम्मद आमीन की पत्नी मेहरूनिशां, फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र बनवाने वाले भतीजे बीकानेर निवासी वसीम अकरम पुत्र शेर मोहम्मद और जमानत देने वाले बीकानेर निवासी देवेन्द्र भाटी को गिरफ्तार किया है लेकिन मुख्य आरोपी बंदी मोहम्मद आमीन के बारे में सुराग नहीं मिला है। फर्जी प्रमाण-पत्र बनाने के मामले की जांच कर रही बीकानेर टीम में शामिल कोटगेट सीआइ धरम पूनिया ने बताया कि फर्जी प्रमाण-पत्र पीबीएम अस्पताल के एक डॉक्टर से बनवाया था। आमीन ने अपने बेटे को अपना बेटा बताकर पेश किया था, चिकित्सक ने उसी बालक की रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण-पत्र जारी किया था। इस प्रमाण-पत्र के आधार पर उसे आपात पैरोल मिली थी