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खुलासा न्यूज,बीकानेर। पूर्व में नियुक्तियों को लेकर विवादों में रहने वाला बीकानेर इंजीनियरिंग कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में आ रहा है। इस बार भी मामला यहां नियुक्त व्याख्याताओं की शैक्षणिक योग्यताओं को लेकर है। जिसके चलते इंजीनियरिग कॉलेज सोसाईटी बीकानेर के अधीन संचालित इसीबी व सीईटी कॉलेज के एसोसिएट/एसिसटेट प्रोफेसरों के शैक्षाणिक दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर पुन:जांच की मांग उठने लगी है। एड सुरेश गोस्वामी ने सुभाष गर्ग तकनीकी शिक्षा मन्त्री से की है। गोस्वामी ने अवगत कराया कि पूर्व प्राचार्य एम पी पूनिया व उसके बाद के प्राचार्यों ने बिना दस्तावेज के सत्यापन करवाये ही अपने चहेतों को नौकरी दे दी। एडवोकेट ने बताया जबकि राज्य सरकार में भी नियुक्ति देने से पहले शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन करवाया जाता है। गोस्वामी ने बताया कि पूर्व प्राचार्य एम पी पूनिया ने सैकडों शैक्षाणिक प्रोफेसरों को बिना अनुभव प्रमाण पत्र – फर्जी डिग्री धारियों को नौकरी दे दी जो आज कॉलेज की खराब वितीय हालात के जिम्मेवार है। एडवोकेट ने दावा किया है कि यदि सभी शैक्षाणिक प्रोफ़ेसरों के दस्तावेज़ों के जॉच की जाये तो कम कम 200-250 मुकदमें दर्ज होंगे। क्योंकि उनकी डिग्री यूजीसी -एआईसीटीई के नियमों के विरुद्ध है तथा पूर्व प्राचार्य भी सलाखों के पीछे होंगे। एडवोकेट ने जानकारी दी कि सत्यापन के बिना ही कई सालों करोड़ों का लाभ इन फ जऱ्ी डिग्री धारियों को दिया जा रहा है।
यूजीसी में मान्यता नहीं,फिर भी फर्जी डिग्री
एम पी पूनिया पूर्व प्राचार्य इंजीनियरिग कॉलेज व वाइस चेयर मैन एआईसीटीई ने बीकॉम धारी अजीत पूनिया पुत्र एम पी पूनिया को सीईटी बीकानेर ने फर्जी कूटरचित छलकपट कर अनुभव प्रमाण तथा जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ उदयपुर के एमसीएस कोर्स को एमएससी की डिग्री बताकर रीडर के पद नियुक्त कर सैकडों छात्रों के फीस का दुरुपयोग कर अपराध करने पर मुकदमा न्यायालय मे परिवाद पेश किया जायेगा। एडवोकेट गोस्वामी ने बताया 9-6-06 को कमांक न एफ 7(6) एसएसटीअी /ईसीबी /141/2006/3006 जारी अनुभव प्रमाण पत्र को 3 सदस्यीय जांच कमेटी ने फर्जी माना। एडवोकेट ने बताया कि जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ उदयपुर द्वारा एसएनओ/ 2050/ आरईजीएन/डीई/2001/5648- दिनांक 6-5-2005 मास्टर ऑफ कम्प्यूटर साईस लेटरल आधार में 1 वर्षीय डिग्री जारी की गई है। जिसे एम पी पूनिया व अजीत पूनिया ने फर्जी धोखा व कूटरचित तरीके व छल कर एमएससी बताकर प्रयोग किया। एडवोकेट ने बताया की उक्त एमसीएस कोर्स को यूजीसी के क्लॉज 22 में मान्यता ही नहीं है यही अन्य अनुभव जो फर्जी थी,उन्हें शामिल कर अपराध कारित किया।
केन्द्रीय मानव संसाधन मन्त्री से मांगा स्पष्टीकरण
उधर एडवोकेट गोस्वामी ने केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरवाल से इसको लेकर स्पष्टीकरण मांगा।क्या बी कॉम डिग्री के बाद लेटरल आधार मे प्रवेश कर एक वर्षीय मास्टर डिग्री मान्य है? एआईसीटीई के वाईस चेयरमैन एम पी पूनिया ने अपने द्वारा नियुक्त अजीत पूनिया रीडर को उच्चतम न्यायालय के निर्णय की आड मे फर्जी तरीके से विशेष परीक्षा में बैठाकर पास करवा दिया। माननीय न्यायालय मे 4 डींड यूनिवर्सिटी को पत्राचार के आधार मे कोर्स फर्जी मानते अवैध माना था। विदित रहे कि राज सरकार ने अजीत पूनिया की डिग्री को फर्जी माना और उसकी सेवा समाप्त कर दी – ज्ञात रहे कि अजीत पूनिया बी कॉम डिग्री धारी है ओर उसने जनार्दन राय नागर विश्व विधालय से एक वर्षीय मास्टर डिग्री की। जिसे एम पी पूनिया ने अजीत पूनिया को रूह्यष् बताकर नियुक्ति दी है जबकि वह एमएससी की अंकतालिका है ओर जिसे यूजीसी क्लॉज़ 22 में मान्यता नहीं है। यही नही रीडर पद के 5 साल के अनुभव को भी दरकिनार कर 2 वर्ष के अनुभव को इंजीनियरिग संकाय मे रीडर का महत्व पद दिया।