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बीकानेर। वर्तमान लॉकडाउन की स्थिति में बीकानेर के व्यापारी दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। पूरे राजस्थान में सिर्फ बीकानेर शहर को सील करके कफ्र्यू लगाया हुआ है। दस दिन हो गये हैं पर इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिल रहा है। पहले भी सत्तर दिन का लॉकडाउन लगाया गया था। राजस्थान में अन्य जगहों से बीकानेर से ज्यादा कोरोना मरीज आ रहे हैं। कहीं लॉकडाउन नहीं है। कब तक बन्द रखोगे। व्यापारी इस लॉकडाउन के कारण आर्थिक रुप से बेहाल हो चुके हैं। व्यापारी बेरोजगार हो चुके हैं। कई दुकानें बन्द हो चुकी है, कुछ बन्द होने की कगार पर है। व्यापार कब तक बन्द रखकर व्यापारियों को बेरोजगार बनाकर रखेगा प्रशासन। व्यापारी कहाँ से संस्थान का किराया, बिजली का बिल, बाजार का बकाया और अपना घर खर्च चुकायेगा। जब फैक्ट्रियां बैंक, रोडवेज़, सरकारी ऑफिस इत्यादि सब खुले हैं तो सिर्फ व्यापार ही क्यों बन्द है। क्या व्यापारी सोफ्ट टारगेट है? क्या सरकार व्यापारियों के नुकसान की भरपाई करेगी। क्या सिर्फ व्यापारी ही कोरोना बीमारी फैला रहे हैं। व्यापारियों की आर्थिक हानि सहने की क्षमता समाप्त हो चुकी है। अवसाद में व्यापारी आत्महत्या जैसे गलत कदम उठा लेंगे तो क्या प्रशासन इसकी जि़म्मेदारी लेगा। राजस्थान के मुख्य सचिव ने लॉकडाउन को नकार दिया तो फिर बीकानेर में लॉकडाउन क्यों? मोहता चौक व्यापार मण्डल के घनश्याम लखानी, कपड़ा व्यापार संघ के हरिश नाहटा और बीकानेर इलैक्ट्रिक ट्रेड एशोसिएसन इस लॉकडाउन का विरोध करते हैं और लॉकडाउन तुरन्त हटाने की प्रार्थना करते हैं। दस दिन बाद त्यौहार है इसलिए लॉकडाउन हटाने की मांग की है।