>



बीकानेर। सेवा में रहते अपने घर पर दवाओं की दुकानें चलाने वाले चिकित्सकों के विरोध में गुरूवार में बीकानेर जिला दवा विक्रेता संघ की ओर से सांकेतिक बंद रखा। विरोध स्वरूप मेडिकल दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर जमकर नारेबाजी की। विरोध कर रहे दुकानदारों का कहना है कि सरकारी सेवा में रहते हुए ऐसे चिकित्सकों ने अपने घरों में खुलेआम मेडिकल की दुकानें चलाकर हमारे जैसे दुकानदारों की रोजी रोटी पर संकट पैदा कर दिया है। हालात ये है कि ऐसे चिकित्सक सरकार और जिला प्रशासन को गुमराह कर मरीजों को खुलेआम लूट रहे है। जिसकी जांच कर सेवा नियम के तहत कार्यवाही की जानी चाहिए। संघ के अध्यक्ष महावीर पुरोहित ने कहा अगर सरकार व प्रशासन नहीं चेता तो आने वाले दिनों में इसे जन आन्दोलन बनाकर विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे। पुरोहित ने कहा कि सरकार ऐसे चिकित्सकों का तबादला कर जनता को राहत प्रदान करें अन्यथा प्रदेशव्यापी जनआन्दोलन चलाया जाएगा।

 

खुलासा की मुहिम बन रही जनआन्दोलन
आापको बता दे कि खुलासा ऑनलाईन पोर्टल ने 14 दिसम्बर को बीकानेर के यह डॉक्टर्स पगार ले रहे सरकारी और घर पर भी चला रहे अपनी दुकानदारी शीर्षक नाम से खबर प्रकाशित कर उन चिकि त्सकों के नाम भी उजागर किये थे। जो सेवा नियमों का उल्लंघन कर अपने यहां मेडिकल की दुकानें चला रहे है। जिसके बाद मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने ऐसे चिकित्सकों को नोटिस भी जारी किया था। किन्तु इन चिकित्सकों ने यह कहते हुए अपना जबाब मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को दिया कि वे इस प्रकार की दुकानें संचालित कर सक ते है। ऐसा वे घरों पर आने वाले रोगियों के हितों के लिये करते है। जबकि राजकीय सेवा नियमों की बात करें तो एक पद पर बैठा कोई भी अधिकारी या कार्मिक दूसरा लाभ नहीं ले सकता। अगर वो ऐसा करता है तो उसे सरकार की ओर से नोटिस देकर जबाब तलब किया जाता है। किन्तु सरकारी सेवा में रहते दोहरे लाभ लेने वाले ऐसे चिकित्सकों को न तो सरकार का भय सता रहा है और न ही अस्पताल प्रशासन का।

चिकित्सकों ने बताया था दुष्प्रचार
खुलासा की खबर के बाद चंद चिकित्सकों ने बैठक कर अपने खिलाफ छपी इस खबर को दुष्प्रचार बताया था। लेकिन कैमिस्टों की ओर से गुरूवार को इसी बात को लेकर बंद करना इस बात को इंगित करता है कि खुलासा ने आमजन की आवाज बनकर खबर को प्रकाशन कर इनकी पोल खोली थी। खुलासा आने वाले दिनों में भी ऐसे स्ट्रिंग ऑपरेशन कर सरकारी सेवा में रहते मेडिकल दुकान चलाने वाले या अपने चेहते लैबों से जांच करवाने वालों का खुलासा करेगा।
सरकार क्यों नहीं है गंभीर
हालात ये है कि पीबीएम आये दिन अव्यवस्थाओं को लेकर समाचार पत्रों की सुर्खियों में रहता है। किन्तु राजस्थान की जन हितार्थ कहने वाली कांग्रेस सरकार हो या भाजपा की सरकार। कभी भी इन सरकारों ने इनके खिलाफ कोई ठोस कदम तक नहीं उठाएं। मंजर ये है कि सरकार की लापरवाही का खामियाजा यहां आने वाले जिले और जिले के बाहर के मरीज भोग रहे है। जिनको न केवल इलाज बल्कि निशुल्क दवाईयों का भी लाभ समयावधि में नहीं मिल रहा है।