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जोधपुर। राजस्थान की सबसे सुरक्षित और खुंखार बदमाशों का अंतिम ठिकाना कही जाने जोधपुर सेंट्रल जेल ऑपरेशन फ्लश आउट के बाद भी लगातार अवांछिय सामग्री मिलने का सिलसिला जारी है। हाल ही करीब डेढ़ दर्जन मोबाइल फोन जेल से मिलने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन सख्त हो गया है। एक सप्ताह में दो बार में 18 मोबाइल मिलने और फिर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में है। जेल प्रशासन पर मिली भगत के आरोप भी लगने लगे है। मगर पुलिस बिना साक्ष्य या सबूत के इस बारे में कुछ कहने की स्थिति में नहीं है।
इसी क्रम में सोमवार की देर रात पुलिस के आलााधिकारियों की मौजूदगी में जेल परिसर में बने क्वाटरों में तलाशी ली गई। हालांकि कोई निषिद्ध सामग्री नहीं मिली है। पुलिस की तरफ से क्वार्टरों में ली गई तलाशी से लगता है कि पुलिस ने कुछ लोगों को नामजद किया है। जिसे वह संदिग्ध मान कर वहां पहुंची है। जेल परिसर में पुलिस उपायुक्त्त पूर्व धर्मेंद्र सिंह यादव के सुपरविजन में रात को यहां पर तलाशी ली गई थी।पुलिस उपायुक्त धर्मेंद्र सिंह यादव के अनुसार जेल में पहले 17 मोबाइल मिले। फिर एक वीडियो देखा गया और बाद में एक और मोबाइल बरामद हुआ था। तीन प्रकरण रातानाडा थाने में दर्ज हो गए हैं। अब इन मोबाइलों को यूज किन किन लोगों ने किया और कहां-कहां बातचीत हुई इस बारे में पता लगाने का प्रयास चल रहा है। सबूत और साक्ष्य जुटाने के लिए भी पुलिस को बार-बार जेल की तलाशी में जाना पड़ रहा है। जो मोबाइल मिले है उसमें कुछ लोगों को नामजद किया जा रहा है। संदेह है कि उनका क्वार्टर में रहने वाले लोगों से भी कोई कनेक्शन हो सकता है। पुलिस की तरफ से साक्ष्य जुटाने का काम भी चल रहा है। जल्द ही मामले को लेकर पटाक्षेप किया जा सकता है। प्रकिया लंबी है मगर पुलिस की तरफ से गहन पड़ताल की जा रही है।
बता दें कि जेल डीजीपी राजीव दासौत की तरफ से गत वर्ष 21 नवंबर से लेकर 28 फरवरी के लिए प्रदेश की जेलों में ऑपरेशन फ्लश आउट चलाया गया था। तब काफी मात्रा में जेलों से मोबाइल के साथ निषिद्ध सामग्री जब्त हुई थी। लेकिन जोधपुर केंद्रीय कारागार में फ्लश आउट से तीन दिन पहले ही एक साथ 17 मोबाइल मिलने से पुलिस की नींद उड़ा दी। जबकि जेल परिसर के जैमर और कैमरों को पुलिस कमांड कंट्रोल से जोड़ा हुआ है। जेल के राशन स्टोर इंचार्ज का नाम भी केस में शामिल हो गया, इसके अलावा दो ठेकेदारों के नाम भी उजागर हुए हैं।