प्राचार्य व कार्मिकों को हटाने की सुगबुगाहट की चर्चाएं जोरों पर
बीकानेर। लगातार किसी न किसी मामले को लेकर विवादों में रहने राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में काम करने वाले संविदाकर्मियों पर एक बार फिर गाज गिर सकती है। यहां सेवारत नॉन टीचिग स्टॉफ को हटाने की तैयारी की जा रही है। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन कार्मिकों को हटाने के पीछे मुख्य कारण आर्थिक मंदी बताया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो करीब 100 कार्मिक बेरोजगार हो जाएंगे। एक ओर डेढ वर्ष पहले हटाए गए 150 कार्मिक पुन: कॉलेज में लगने की आस लगाएं बैठे। वहीं दूसरी ओर अब उनकी आस भी टूट सकती है। बताया जा रहा है कि इस प्रकार का प्रस्ताव लेकर कॉलेज प्राचार्य डॉ जयप्रकाश भांभू हाल में जयपुर गए हुए है। जहां मंत्री व तकनीकी विभाग के आलाधिकारियों से चर्चा के बाद कोई निर्णय लेंगे। किन्तु सौ कार्मिकों को हटाने की सुगबुहाट से कॉलेज में हडकंप सा मचा हुआ है और दबी जुबां में कार्मिक इस बात की पुष्टि करने में लग गए है। ऐसी भी सूचना मिली है कि स्थानीय मंत्री के दबाव में यहां नियुक्ति नहीं दे सकने से कॉलेज प्रशासन ने आर्थिक संकट को आधार बनाकर ओर कार्मिकों को निकालने की योजना को मूर्तरूप रूप देना शुरू कर दिया है।
प्राचार्य के हटाने की खबर
सूत्रों ने बताया कि कार्मिकों के साथ साथ प्राचार्य जयप्रकाश भांभू को भी हटाने की चर्चाएं जोरों पर है। अनेक प्रकार के घोटालों के आरोपों से घिरे भांभू के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच चल रही है। जिसको लेकर उनको हटाया जा सकता है।
पहले चेत जाती सरकारें तो ये नहीं होते हालात
इंजीनियरिंग कॉलेज की बर्बादी के लिये यहां के प्रशाासन के साथ साथ सरकारें भी जिम्मेदार है। यहां प्राचार्य जयप्रकाश भांभू,डॉ एम पी पूनियां द्वारा प्रोफेसरों की फर्जी तरीके से दी गई नियुक्तिया,छात्रावासों में हुए घोटाले,असिसटेंट प्रोफेसरों को गैर तरीके से पदोन्नति व वेतनमानों के अनुचित लाभ,कैन्टीन में भ्रष्टाचार सहित कॉलेज में हुए अनेक भ्रष्टाचारों की लगातार समाचार पत्रों में छपने वाली खबरों व शिकायतों के बाद भी न तो स्थानीय प्रशासन ने और न ही तत्कालीन भाजपा सरकार ने दिलचस्पी दिखाई। जिससे यहां भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया। पहले भाजपा और अब कांग्रेस सरकार ने भी इस कॉलेज में हुए घोटालों की निष्पक्षता से जांच नहीं की। जिसका परिणाम रहा कि कॉलेज आर्थिक बदहाली की मार झेल रहा है।