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– सीएमएचओ की जांच में हुई पुष्टि सरकारी दवाओं के दुरुपयोग की
– मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने दिया डॉ.मुकेश सिंघल को नोटिस
बीकानेर । राज्य सरकार ने भामाशाह योजना के तहत गरीब मरीजों के लिए राजकीय अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा दे रखी है लेकिन पीबीएम अस्पताल में ऐसे कई डॉक्टर हैं जो भामाशाह के मरीज निजी अस्पतालों में भिजवा रहे हैं। इससे सरकार को राजस्व की हानि हो रही है और निजी अस्पतालों की खूब कमाई हो रही है।
दरअसल सरकारी अस्पतालों में कैंसर के मुफ्त इलाज के लिए अलग-अलग पैकेज है। गरीब मरीज सरकारी अस्पतालों पर अधिक भरोसा करते हैं लेकिन इन कमीशनखोर डॉक्टरों को सरकार के पास राजस्व आने से कोई फायदा नहीं, इसलिए ये डॉक्टर निजी अस्पतालों में मरीज भेज देते हैं। पीबीएम अस्पताल में इन डॉक्टरों की चर्चा हर स्टाफ की जुबान पर है लेकिन इनकी पहुंच ऊपर तक होने के कारण इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। भामाशाह के मरीज दूसरे अस्पतालों में भेजने वालों में आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल के सहायक आचार्य डॉ. मुकेश सिंघल, डॉ. सुरेंद्र बेनीवाल और डॉ. पंकज टांटिया शामिल है। ये डॉक्टर मरीजों के नाम पर उठाई गई सरकारी दवाएं भी निजी अस्पतालों में खपाने से नहीं हिचकिचा रहे हैं।
डॉ. मुकेश सिंघल सहित सभी डॉक्टर दो बजे तक पीबीएम अस्पताल में अपनी सरकारी नौकरी पूरी करने के बाद अपने घरों में बने क्लिनिक में बैठ जाते हैँ। अस्पताल में आने वाले मरीजों को भी वे घर पर बुला लेते हैं। यहां वे उनसे निजी अस्पतालों की फीस वसूल करते हैं। यहां के मरीजों को कीमो थैरेपी के लिए डॉ. सिंघल तो अपने घर के ठीक सामने निजी अस्पताल गुरुनानक हॉस्पीटल एंड रिसर्च सेंटर में भेज देते हैं। मजे की बात है कि यहां कैंसर जैसे गंभीर रोगियों को कीमो थैरेपी देने के लिए न कोई ऑन्कोलोजिस्ट है और न ही रेडियोलोजिस्ट ही है। यहां रुपयों के लालच में कम पैसों में नर्स और कंपाउंडर का स्टाफ से ही कीमो लगवा देते हैं। इससे मरीज की जान को खतरा भी कई बार हो जाता है।
भामाशाह के मरीजों का कमीशन जेब में
अस्पताल में आने वाले मरीजों को नियमानुसार तो भामाशाह योजना के तहत पूरा लाभ मिलना चाहिए लेकिन यहां राज्य सरकार की योजना को भी सारे डॉक्टर मिलकर पलीता लगाने में लगे हुए हैँ। तीनों डॉक्टरों ने रानीबाजार में एक निजी अस्पताल से अनुबंध कर रखा है जहां हर मरीज के लिए उनका कमीशन बंधा हुआ है।
क्या फर्क पड़ता है सरकार पर
भामाशाह योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में इलाज करने पर उनकी बीमारी के अनुसार पैकेज तैयार किया जाता है। उसके बाद उनका इलाज उसी पैकेज की सीमा में करना होता है। दूसरी ओर निजी अस्पतालों में भेजने पर वे मरीज को बीमारी से डराकर बड़ा पैकेज बनवा लेते हैं। इसमें सरकार की योजना में प्राप्त सुविधा का अनुचित तरीके से इस्तेमाल कर ज्यादा दवाओं का उपयोग किया जाता है। इससे निजी अस्पतालों को सरकार से पैसा अधिक मिलता है और वे इसमें से डॉक्टरों को कमीशन के रूप में बड़ी राशि हर मरीज के हिसाब से देते हैं।
दवाओं का कमीशन भी नहीं छोड़ते, घर में ही दुकानें –
कीमो थैरेपी के अलावा कैंसर मरीजों को दवाओं पर बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। जिंदगी और मौत से जूझते इन मरीजों पर डॉक्टरों को दया नहीं आती और वे ज्यादा से ज्यादा दवाएं लिखने का प्रयास करते हैं। ये दवाएं भी इनकी बताई हुई दुकान से ही लेनी होती है। डॉ. सिंघल तो सतगुरु मेडिकल स्टोर पर अपनी पर्चियां भिजवाते हैँ जबकि डॉ. बेनीवाल और डॉ. टांटिया के तो घर में ही अवैध रूप से मेडिकल स्टोर संचालित हैं। यहीं से मरीजों को दवाएं लेनी पड़ती है। इन डॉक्टरों के घरों में मेडिकल स्टोर की शिकायतें पूर्व प्राचार्य के समय कई बार की गई लेकिन इनका वे कुछ भी नहीं बिगाड़ सके।
सीएमएचओ ने की प्राचार्य से शिकायत –
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेंद्र चौधरी ने डॉ. मुकेश सिंघल के बारे में शिकायतें मिलने पर उनके घर के सामने गुरुनानक हॉस्पीटल एंड रिसर्च सेंटर पर चुपके से जांच कराई थी। इसमें वहां निजी अस्पताल में सरकारी दवाएं पड़ी हुई पाई गई। ये दवाएं इस सेंटर में भर्ती मरीजों को लगाई जा रही थी। दरअसल यह सेंटर ही एक तरह से अवैध रूप से संचालित हो रहा है। इसके अलावा वहां डॉ. मुकेश सिंघल के नाम के सरकारी पैड भी मिले। इस पर ही वे सरकारी दवाएं लिखकर अस्पताल से मंगवा लेते हैं और गुरुनानक हॉस्पीटल एंड रिसर्च सेंटर में उसका उपयोग करते हैं।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने दिया डॉक्टर को नोटिस –
डॉ. देवेंद्र चौधरी ने जांच की रिपोर्ट मंगलवार को सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. एच.एस कुमार को भेजी। बुधवार को मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एच.एस. कुमार ने इस पर कार्रवाई करते हुए डॉ. मुकेश सिंघल को नोटिस दिया है। इसके साथ ही बाकी डॉक्टरों को भी हिदायत दी है कि वे सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को दूसरे अस्पताल में नहीं भेजें जबकि हमारे यहां इलाज उपलब्ध है।
इनका कहना है
कई बार ज्यादा मरीज आने पर निजी अस्पतालों में भेज देते हैं। कुछ मामलों में मरीज भी जल्दी इलाज के लिए बाहर के अस्पतालों में भी जाने का दबाव डालते हैं। इसलिए भेजना पड़ता है। – डॉ. मुकेश सिंघल, सहायक आचार्य, आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर सेंटर, बीकानेर
– मुझे कई मरीजों से शिकायत मिली कि डॉ. मुकेश सिंघल घर पर मरीजों को देखते हैं लेकिन निजी क्लिनिक में सरकारी दवाएं मुफ्त मंगवाकर मरीजों से पैसा वसूल कर उन्हें देते हैं। इस जांच करने पर शिकायत की पुष्टि हुई। इस बारे में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को पत्र लिखकर अवगत कराया गया हैं। – डॉ. देवेन्द्र चौधरी, सीएमएचओ, बीकानेर