खुलासा न्यूज़, बीकानेर। नगर निगम के प्राधिकृत अधिकारी द्वारा किए गए परिसीमन के पहले ही चरण पर उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है ।

याचिकाकर्ता सुरेन्द्रसिंह शेखावत ने निगम के प्राधिकृत अधिकारी द्वारा किए गए प्रारंभिक परिसीमन में राजनीतिक दुर्भावना का आरोप लगाया है। साथ ही नियमों के विरुद्ध परिसीमन के लिए आपत्तियां मांगने को असंवैधानिक बताया है।

सुरेन्द्र सिंह की ओर से उच्च न्यायालय जोधपुर में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता निमेष सुथार ने न्यूजफास्ट वेब को बताया कि याचिका में मुख्य रूप से राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 3, 6, 9 व 10 तथा राजस्थान नगरपालिका चुनाव नियम 1994 के नियम 3 व 4 के स्पष्ट उल्लंघन के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया को फिर से शुरू करवाने के लिए मांग की गई है ।

गौरतलब है कि बीकानेर नगर निगम के परिसीमन के लिए आपत्ति के समय न तो अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के वार्ड नहीं बताये गये जो कि नियमों के हिसाब से आवश्यक है और न ही किसी वार्ड की जनसंख्या बताई गई है जिससे कि वार्डो के क्षेत्र के विरुद्ध धारा 9 व 10 के तहत कोई आपति ली जा सके।

साथ ही नगर निगम के क्षेत्र से सटते बहुत बड़े भूभाग जैसे उदासर, विराट नगर, डिफेन्स कॉलोनी, वृन्दावन नगर आदि गहन आबादी के क्षेत्र भी परिसीमन के बाहर रख दिए गए हैं । राज्य सरकार के परिसीमनके लिए दिये गये उक्त आदेश में स्पष्ट दिशा निर्देशों की भी अनुपालना 5 जुलाई को परिसीमनके विरुद्ध मांगी गई आपत्ति व ड्राफ्ट परिसीमन व ड्राफ्ट मैप से परिलक्षित नहीं होती है ।

इस सम्बन्ध में कई मांग पत्र भी विभिन्न संस्थाओं की ओर से दिये गये । परन्तु प्राधिकृत अधिकारी द्वारा कोई उचित आश्वासन न मिलने और पूर्व के चुनावों में भी इस तरह की आपत्तियों को दरकिनार करने की निगम की प्रवृत्ति को देखते हुए व्यथित होकर उच्च न्यायालय की शरण ली गई है ।