बीकानेर। कृषि प्रसंस्करण प्रयोजनार्थ राज्य के बाहर से आयातित कृषि जिंसों व चीनी पर बकाया मंडी शुल्क माफ़ी योजना के तहत 50 प्रतिशत मंडी शुल्क एवं ब्याज व शास्ति में छूट नही दी गई तो जिले में इस व्यवसाय से जुड़े व्यापारी अपने उधोगो की चाबी मुख्यमंत्री को सौप देंगे। यह बात जिला उधोग संघ में आयोजित पत्रकार वार्ता में
बीकानेर दाल मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नरसिंहदास मिमाणी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयकिशन अग्रवाल एवं सचिव राजकुमार पचीसिया ने कही। उन्होंने कहा कि इस मांग को लेकर राज्यभर के व्यापारी 15 मार्च को जयपुर में जुटेंगे। जिसमे चरणबद्ध आदोंलन की रूपरेखा बनाई जाएगी। अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा कृषि आधारित उद्योगों को राहत प्रदान करने हेतु जो प्रयास किया गया है,लेकिन वर्तमान में इन उद्योगों की दयनीय स्थिति को देखते हुए 27.04.05 से 31.12.19 तक अन्य राज्यों से आयातित कच्चे माल पर मंडी शुल्क की 50 प्रतिशत राशि भी इन उद्योगों द्वारा जमा करवाना भी संभव नहीं है। जबकि वर्तमान में राज्य सरकार ने नवीन स्थापित कृषि आधारित उद्योगों को आरटीपीएस 2019 के तहत मंडी शुल्क में 100 प्रतिशत छूट के साथ साथ अनेक तरह की रियायतें दी है जबकि वर्तमान में स्थापित कृषि आधारित उद्योग जो कि भारी मंदी से ग्रस्त हैं उनके लिए किसी तरह की कोई योजना या छूट का प्रावधान न होने की वजह से अब तक यह औद्योगिक इकाइयां पड़ोसी राज्य की शून्य मंडी शुल्क वाली इकाइयों से प्रतिस्पर्द्धा कर रही थी अब नवीन योजना आरटीपीएस 2019 के बाद राज्य में नवस्थापित उद्योगों से प्रतिस्पर्द्धा में पूरी तरह से पिछड़ जायेगी व पुराने उद्योगों का अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। और इन पुरानी इकाइयों के अस्तित्व को बचाने के लिए 27.04.05 के बाद अन्य राज्यों से आयातित कच्चे माल पर मंडी शुल्क पर 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जाए और भविष्य में भी पुरानी इकाइयों के लिए एसी योजनाएं लागू की जाए ताकि इन्हें कम से कम मंडी शुल्क का भुगतान करना पड़े। पत्रकार वार्ता में द्वारकाप्रसाद पचीसिया, अशोक गहलोत, शिवशंकर प्रजापत,गोविंद गोवर, हरिकिशन गहलोत, मनोज अग्रवाल, परवेश गोयल, राजा डोगरा, प्रमोद गहलोत, गिरिराज मिमाणी, अभिषेक काजानी, रामस्वरूप गोदारा, पंकज थिरानी, सुरेश बजाज सहित अनेक दाल मिल उद्यमी उपस्थित रहे।