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– एक अगस्त से स्कूल बस वाले वसूलेंगे दो से तीन गुना अधिक फीस
खुलासा न्यूज़, बीकानेर। बीकानेर में टैक्सी चालकों की हड़ताल खत्म हो गई है, लेकिन एक अगस्त से स्कूल बस वाले दो से तीन गुना अधिक फीस वसूलेंगे। ऐसे में अभिभावकों पर दोहरी मार पड़ेगी। जानकारी के अनुसार पूर्व में भी आरटीओ की कार्रवाई के बाद 350 रुपए से बढ़कर फीस 800 रुपए कर दी गई थी, लेकिन कुछ समय बाद बच्चे तो ठूंस ठूंस कर भरने शुरू कर दिए मगर फीस कम नहीं की गई। नतीजा अभिभावक अपने आप को ठगा महसूस करता रहा। दो गुना फीस पर बच्चे फंस फंस कर जाने लगे। अब वही कहानी से फिर से दोहराई जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई से यदि तीन गुना फीस देनी पड़ी तो वाहनों के खारिज मॉडल भी सड़कों से हटाने चाहिए। वरना यह कार्रवाई महज जबरन वसूली अभियान ही साबित होगी या ज्यादा कड़े शब्दों में कहें तो प्रशासनिक दबाव में अभिभावकों की जेब पर डाका माना जाएगा। क्योंकि अभी तीन बच्चों वाले अभिभावकों को 2700 रुपए बस भाड़ा चुकाना पड़ रहा है उन्हीं अभिभावकों को इस कार्रवाई के बाद 6000 से 6500 रुपए देने पड़ेंगे। यानि बीच सत्र में ही बजट बिगड़ जाएगा। कई अभिभावकों ने बताया कि वर्तमान बस फीस भी पार नहीं पड़ रही है ऐसे में बढ़ी हुई फीस को मैनेज करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। अभिभावक बढ़ी हुई स्कूल फीस एवं महंगी किताबों से जूझ रहे हैं। इन बढ़ती कीमतों पर किसी प्रकार का कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। ऐसे लग रहा है सरकार बजट बिगाड़ो, पढ़ाई छुड़ाओ अभियान छेड़ रही है।

अभिभावक जांचें वाहनों की स्थिति
अभिभावकों एवं समाज के जागरूक नागरिकों का यह दायित्व बनता है कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए निजी बस संचालकों के मकडज़ाल को तोड़ें। इसके लिए स्कूलों में लगी बसों के मालिकों को उनकी जिम्मेदारी के बारे में बताएं। बस चालक का लाइसेंस चेक करने के साथ बस के मेंटिनेंस को चेक करें, बस के पंजीकरण से जुड़े कागज चेक करने के बाद उसके स्कूल से संबद्धता को भी चेक करें। वाहन चालकों की जानकारी के बाद ही किराए में बढ़ोतरी करें।

स्कूल झाड़ लेते हैं जिम्मेदारी से पल्ला
पुलिस एवं आरटीओ की ओर से अभियान चलाए जाने के बाद स्कूल वाले इन बसों से अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। यहां तक की कई बार अभियान के दौरान बस वाले बच्चों को बीच रास्ते छोड़कर निकल गए हैं और अभिभावकों को सूचना तक नहीं दी। समय-समय पर अभिभावकों के नाम भेजे नोटिस में स्कूल वालों ने स्पष्ट किया है कि स्कूल से संबद्ध वाहन से उनका कोई लेना देना नहीं है। वास्तविकता यह है कि इन बसों का संचालन निजी स्कूलों के कैंपस से हो रहा है। बच्चों के स्कूल आने और जाने के समय बसें स्कूल में पार्क की जाती हैं। बस संचालक अपनी रसीद बुक पर भी स्कूल का नाम छापते हैं, फीस भी स्कूल में बने काउंटर पर जमा होती है। स्कूल की ओर से इन बस संचालकों को कैंपस में बिना रोक-टोक आने की अनुमति है। ऐसे में इन बसों के संचालकों को आखिर में स्कूल प्रबंधन अपने यहां संबद्धता प्रमाण पत्र देने से क्यों बच रहा है।