खुलासा न्यूज़, बीकानेर। अंधा बांटे रेवड़ी फिर फिर खुद ही लेय की कहावत इन दिनों बीकानेर  तकनीकी  विश्वविद्यालय में देखने को मिल रही है। जहां अपने चेहतों को लाभ पहुंचाने के लिये विभागीय  नियमों को ताक में रखकर कर आदेशों की धज्जियां उडाई जा रही है। यहीं नहीं विभागीय आदेशों की  आड़ में विवि प्रबंधन अपने नये आदेश निकालकर केवल अपने चेहतों को फायदा पहुंचाने की जुगत  में लगा है।  ऐसा ही एक  एक नया मामला फिर प्रकाश में आया है। जिसमें तकनीकी विभाग के  आदेशों को धता बताकर दोहरे मापदंड अपना रहा है।

ये है विभागीय गजट नोटिफिकेशन
तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा एक अधिसूचना 3 अगस्त 2018 को राजस्थान गजट में प्रकाशित की  थी। जिसमें बीकानेर तकनीकी विवि में इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी महाविद्यालय बीकानेर की स ंपत्ति,खातों और शिक्षकों के विलय की बात कही गई थी। तब शिक्षकों को छोड़ सब का विलय भी हो  गया था और व्याख्ताओं के विलय के लिये तकनीकी शिक्षा विभाग ने 7 अगस्त 2018 को एक समिति का गठन किया। जिसमें बीटीयू कुलपति को अध्यक्ष,उपसचिव को सदस्य सचिव और  यूसीईटी प्रिसिंपल को सदस्य बनाया था। मजे की बात ये है कि इसमें से एक सदस्य यूसीईटी के  प्राचार्य संजय बंसल स्वयं लाभार्थी थे। 31 मई 19 को जयपुर में हुई बैठक के निर्णयानुसार 26 अगस्त   19 को विभाग ने एक आदेश निकालकर जिसमें 56 पदों का अस्थाई निर्माण (5 एसोसिएट प्रोफेसर,51 सहायक प्रोफसर पद) विवि में विलय किये जावें। जिसके बाद 28 अगस्त को विवि के  रजिस्ट्रार ने दो अलग अलग आदेश जारी किये। 32 संकाय सदस्यों के लिये एक और 13 सदस्यों के  लिये अलग। जबकि 11 संकाय सदस्यों के लिये कोई आदेश जारी नहीं किया गया। इनमें से भी 32  के लिये स्थाई और 13 के लिये अस्थाई आदेश जारी हुआ। जबकि विभाग ने 56 पदों के विलय के  निर्देश दिए थे।

पना रहे है दोहरे मापदंड
हैरान करने वाली बात तो ये है कि विवि विभाग के एक ही आदेश में दोहरे मापदंड अपना कर कई  व्याख्ताओं की भावनाओं को चोट पहुंचा रहा है। बताया जा रहा है कि  जिन 11 संकाय सदस्यों के  लिये किसी प्रकार का आदेश जारी नहीं किया गया। उसके पीछे विवि प्रबंधन का तर्क है कि इन्होंने  कोर्ट में केस दर्ज कर रखा है। जबकि मजे की बात ये है कि 32 संकाय सदस्यों में से 4 एसोसिएट  प्रोफेसर ने भी कोर्ट में वाद दायर कर रखा है। जिसमें संजय बंसल (मामला संख्या सीडब्लू  11534/2012)भी शामिल है। जिसका एलआईटीईएस सॉफ्टवेयर पर विवरण उपलब्ध है। इस  मामले के ओ आई सी की नियुक्ति 29 मार्च 19 को कुलपति स्वयं की गए है।

स्थानीय मंत्रियों की चुप्पी समझ से परे
विवि में लगातार विभागीय नियमों की अनदेखी कर अपनी डफली अपनी राग की तर्ज पर काम कर रहे कुलपति व यूसीईटी के प्राचार्य के लगातार उजागर हो रहे मामलों में स्थानीय मंत्रियों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पूर्व में राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक एवं अत्याचार विरोधी टाईगर्स संस्थान ने कई मामलों को उजागर भी किया था। जिसकी शिकायत के बाद जयपुर से टीमें भी आई और उन टीम सदस्यों ने शिकायत का सही भी पाया। उसके बाद भी न तो सुशासन व पारदर्शी सरकार देने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और न ही स्थानीय मंत्री डॉ बी डी कल्ला और भंवरसिंह भाटी विश्वविद्यालय में लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार के मामले को गंभीरता से ले रहे है। अब विवि के गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चा जोरों पर है कि आखिर सरकार व स्थानीय नेताओं की क्या मजबूरी है जो न तो इंजीनियरिंग कॉलेज में और न ही तकनीकी विवि में उजागर हो रहे भ्रष्टाचार पर ठोस कदम उठा रहे है।

बटोर रहे है झूठी वाही वाही
इधर कुलपति स्थानीय समाचार पत्रों में विवि में भर्ती की खबरों को प्रकाशित करवाकर झूठी वाहीवाही लूट रहे है। जबकि हकीकत में यहां कार्यरत शिक्षकों व कार्मिकों के साथ दोहरे मापदंड अपनाकर उन पर कुठाराघात कर रहे
है।