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जयपुर: कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सीएम गहलोत के शक्ति प्रदर्शन के बाद अब सचिन पायलट का बड़ा बयान सामने आया है. ये बयान एक टीवी चैनल के माध्यम से सामने आया है. जिसमें सचिन पायलट ने कहा कि हमने समझौते की कोई शर्त नहीं रखी है. साथ ही आलाकमान में मेरी किसी से कोई बात नहीं हुई है. साथ ही उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत के पास सिर्फ 84 विधायक हैं, जबकि बाकी सभी विधायक मेरे साथ है.

राजस्थान सियासी संकट को सुलझाने के प्रयास:
पहले जानकार सूत्रों के हवाले से खबर सामने आई थी, उसमें कहा गया था कि अब राजस्थान सियासी संकट को सुलझाने के प्रयास हो रहे हैं. खुद प्रियंका गांधी इसकी मध्यस्थता कर रही है. सूत्रों के मु​ताबिक प्रियंका गहलोत और पायलट दोनों से बात कर रही है. ऐसे में जानकारी के मुताबिक पायलट ने आलाकमान के सामने कुछ मांगे रखी है. सूत्रों के अनुसार पायलट गृह और वित्त विभाग खुद के पास रखना चाहते हैं. इसके साथ ही अपने करीबी 4 विधायकों को मंत्री बनाने की मांग की है. वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद भी पायलट अपने पास रखना चाहते हैं.

इससे पहले बीजेपी के आईटी सेल के हेड अमित मालवीय ने ट्वीट करके राजस्थान में फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि कांग्रेस बहुमत साबित करें.

अलोकतांत्रिक कृत्यों की कठोर शब्दों में निंदा:
इससे पहले राजस्थान सरकार पर मंडराते खतरे के बीच कांग्रेस विधायक दल की सोमवार को सीएमआर में बैठक हुई. जिसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार पर मंडराता खतरा हटता हुआ नजर आया. सीएमआर में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सौ से ज्यादा विधायक पहुंचे. जहां पर सीएम अशोक गहलोत ने शक्ति प्रदर्शन करते हुए विक्ट्री साइन दिखाया. इसके साथ ही संदेश दिया कि उनके पास बहुमत है और सचिन पायलट के सभी दावे गलत साबित होते दिखाई दे रहे हैं. बैठक के बाद सभी अलोकतांत्रिक कृत्यों की कठोर शब्दों में निंदा की गई. पार्टी या सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल विधायकों, पदाधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी. प्रदेश की जनता की सेवा के प्रति विधायक दल संकल्पबद्ध है. प्रस्ताव में  विधायक दल ने मुख्यमंत्री गहलोत पर विश्वास जताया है.