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 बीकानेर। पीबीएम में पेशनर्स की दवाईयों की खरीद में करोड़ों के घोटाले में सोमवार को एसीबी में मामला दर्ज हुआ है। एएसपी रजनीश पूनिया ने बताया कि इस प्रकरण में सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के  अतिरिक्त प्राचार्य डॉ लियाकत अली गौरी सहित होलसेल भंडार के तत्कालीन महाप्रबंधक मनमोहन सिंह यादव, अनिल कुमार गुप्ता, भंडार के दुकानदार विनोद, रामकुमार, बजरंग व तीन-चार अन्य के खिलाफ  एसीबी में मामला हुआ है। पीबीएम में   वर्ष 2015-16 व 2016-17 के दौरान जेनरिक दवाईयों की जगह ब्रांडेड दवाईयों खरीद की गई। जिसमें सरकार को करोड़ों रुपयों घोटाला उजागर हुआ था।  ऑडिट रिपोर्ट में हुआ खुलासा
वर्ष 2007-08 की ऑडिट रिपोर्ट में करीब एक करोड़ पांच लाख रुपए के भुगतान पर आपत्ति की गई थी। जिला कलेक्टर के निर्देश पर इसकी जांच के लिए छत्तरगढ़ के उप कोषाधिकारी नरसीराम हटीला, जिला  कोष कार्यालय के लेखाकार जैनूदीन और होलसेल भंडार के सुपरवाइजर शक्ति सिंह का तीन सदस्यीय दल गठित किया गया था। इस दल ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है। दल ने वर्ष 2007-08 में पेंशनर शॉप के  लिए की गई दवाइयों की खरीद-फरोख्त से संबंधित रिकार्ड की छानबीन की। इस दौरान 59 लाख रुपए के ऐसे वाउचर मिले, जिनमें संबंधित पेंशनर का रिकार्ड पीबीएम अस्पताल में भर्ती पेंशनर के रिकार्ड से  मेल नहीं खा रहा था। आरोप है कि पीबीएम अस्पताल के मेडिसिन, कैंसर, टीबी, ईएनटी व एक्स वार्ड में भर्ती पेंशनरों के नाम से फर्जी एंट्रियां करके भुगतान उठा लिये। जांच के दौरान बाइस लाख रुपए की  दवाइयों की खरीद-फरोख्त के रिकार्ड का ही सत्यापन हो सका। इसके अलावा 13 लाख रुपए से अधिक के ऐसे वाउचर हैं, जिन पर तिथि और रजिस्ट्रेशन नंबर तक नहीं थे।  इस प्रकरण में 59 लाख रुपए कोष  कार्यालय ने जब्त कर लिए तथा दोषी रहे कार्मिकों के विरुद्ध पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।
ये है भ्रष्टाचार का लेखा जोखा
बीकानेर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार में वर्ष 2006-07 में स्थानीय निधी अंकेक्षण विभाग ने ऑडिट की। 285 दिनों तक चली इस ऑडिट में राजस्थान पेंशनर्स मेडिकल रीलिफ सोसायटी फंड में हेराफेरी  उजागर हुई। रिपोर्ट के आधार पर भंडार के एक कार्मिक को बर्खास्त कर 54,73,296 रूपये की वसूली निकाली गई। इसमें से 5000000 रूपये का उस कर्मचारी के प्रति आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ  एफआईआर दर्ज करवाकर शेष राशि के प्रकरण को दबा दिया गया।
ये है मामला
हॉस्पिटल में भर्ती पेंशनर रोगी को डॉक्टर ने दवा लिखी। भंडार की मेडिकल शॉप पर डायरी की फोटो कॉपी लेकर दवा दे दी गई। बाद में भंडार के सेल्समैन ने उसी फोटो कॉपी पर और दवाइयां लिख डाली।  वाउचर बनाकर भंडार को जमा करा दिया। कोष कार्यालय ने बाद में उसका भुगतान भी कर दिया। ऐसी गड़बडिय़ां पेंशनरों को एक साल में लिखी 22 हजार से अधिक पर्चियों में हुई हैं। पीबीएम हॉस्पिटल में भर्ती  पेंशनरों के नाम से फर्जी वाउचर तैयार कर एक करोड़ 29 लाख रुपए से अधिक का भुगतान उठा लिया गया। सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार की वर्ष 2005-06 की ऑडिट रिपोर्ट में 11 साल बाद वित्तीय  अनियमितताओं का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि राजस्थान पेंशनर्स चिकित्सा सुविधा योजना (आरपीएमएफ) के अनुसार पेंशनर्स को वे ही दवाइयां देय है , जो राजस्थान चिकित्सा परिचर्या नियमों के अंतर्गत राज्य कर्मचारियों को देय है। उसके बावजूद कोषालय ने दावों की जांच किए बिना ही भंडार को भुगतान कर दिया। इसमें एक लाख 36 हजार से अधिक कीमती बल वर्धक टॉनिक भी शामिल हैं। इस मामले को होलसेल भंडार के डायरेक्टर नगेन्द्र सिंह ने प्राथमिकता से उठाया था।