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बीकानेर। फसल में हुए नुकसान का मुआवज प्राप्त करने के लिए भारतीय स्टेट बैक व एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के विरुद्ध न्यायालाय स्थाई लोक अदालत बीकानेर के समक्ष आवेदन पत्र दौलत राम व 23 अन्य व्यक्तियों ने सन 2016 में प्रस्तुत किया था। पत्र में उन्होंने बताया कि इन सभी व्यक्तियों ने 2016 में भारतीय स्टेट बैक शाखा कालू से लोन प्राप्त कर किसान के्रडिट कार्ड बनवाया था। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अनुसार ऋण प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के लिए बीमा कराना बैकों के लिए अनिवार्य होगा। एसबीआई बैंक द्वारा नियमानुसार इन सभी व्यक्तियों का बीमा नहीं करवाया गया। बीमा नहीं करवाये जाने के  कारण सभी व्यक्तियों को फसल में हुए नुकसान का मुआवजा इंश्योरेंस कंपनी से प्राप्त नहीं हुए इस कारण सभी व्यक्तियों को मुआवजा दिलवाये जाये। बैक की ओर से अमित गांधी एडवोकेट ने पैरेवी की जिसमें उन्होने बताया कि नुकसानी का मुआवजा प्राप्त करने के लिए प्रार्थीगण को फसलों में नुकसान कितना हुआ ये साबित करना होगा। नुकसान साबित करने के लिए पटवारी की रिपोर्ट व तहसीलदार द्वारा प्रमाणीकरण नहीं प्रस्तुत किया गया और ना ही राज्य सरकार द्वारा नुकसान दिये जाने का आदेश ही प्रस्तुत करे। बीमा कंपनी की ओर से नंदकिशोर गांधी एडवोकेट ने एसबीआई बैंक ने एग्रीकल्चर इंश्योरेश कंपनी को प्रार्थीगण के खाते से कटौती कर प्रीमियम बीमा कंपनी को नहीं भिजवाया थ। लोक अदालत बीकानेर के अध्यक्ष डॉ. श्रीमति कमल दत्त व सदस्य दयाराम गोदारा ने निर्णय दिया कि फसल में नुकसान होना ओर किस तरह सरकार द्वारा या तहसीलदार द्वारा नुकसान क आंकलन किया गया साबित नहीं कर सके है। इस तरह से एसबीआई बैंक की सेवाओं में कोई किसी प्रकार की कमी नहीं है। न्यायालय स्थाई लोक अदालत में बीकानेर ने सभी 24 प्रार्थना पत्र इस आधार पर अस्वीकार कर खारिज कर दिये।