मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश के बालाघाट और मंडला जिले में जानवरों को खिलाने के लिए रखा गया घटिया चावल इंसानों को बाटां गया। जब जानवरों वाला घटिया चावल बांटने के मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान की सरकार हरकत में आई और सीएम के निर्देश पर मामले की जांच ईओडब्ल्यू की जबलपुर यूनिट को सौंप दी गई है। शुक्रवार को पता चला कि मई और जून में भोपाल, शिवपुरी, भिंड और सागर जिले में भी जिला प्रबंधकों ने इसी तरह का घटिया चावल बांटने की शिकायत की थी, लेकिन खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के अफसरों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और यह चावल लोगों में बांट दिया गया।
भोपाल सहित 4 और जिलों में बंटा था घटिया चावल
सागर व शिवपुरी जिले में 23 से 35 हजार क्विंटल चावल से भरे दो रैक आए थे, जबकि भोपाल में भी 350 क्विंटल चावल बांटने की बात सामने आ रही है। वहीं, मंडला व बालाघाट के दो गोदामों में मिला 47000 क्विंटल चावल पोल्ट्री ग्रेड का चावल सील कर दिया गया है। साथ ही बालाघाट में फ्री प्राइज़ शाप भी सील की गई है।
अफसरों ने क्यों नहीं जांची क्वालिटी
बालाघाट और मंडला का पोल्ट्री ग्रेड का चावल किन-किन जिलों में बांटा गया। अब यह भी एक बड़ा सवाल बन गया है, जिसकी जांच की जा रही है। हर साल 7.50 लाख टन चावल गरीबों में बांटा जाता है, लेकिन इस साल कोरोना के कारण केंद्र ने गरीबों को मुफ्त चावल बांटे जाने के ऐलान के बाद 3.50 लाख टन खपत बढ़ गई। इससे मिलर्स ने आनन-फानन में जो चावल सप्लाई कर दिया, वो एफएक्यू स्तर का नहीं था। इस हिसाब से 100 किलो धान से निकला 67 किलो चावल जरूरी था। मानकों के अनुसार 1 क्विंटल चावल में 25 किलो टूटन ही हो सकती है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में जो चावल बांटा गया, उसमें टूटन 40 से 50 प्रतिशत तक थी। इसकी क्वालिटी कंट्रोलर अफसरों ने क्यों नहीं जांची। इसमें यह भी सामने आ रहा है कि औसत दर्जे से निम्न स्तर का चावल होने पर प्रति क्विंटल के हिसाब से निचले स्तर का होने पर 25 से 35 रुपए प्रति क्विंटल दिया जाता था। यह राशि साल भर में 50 करोड़ रुपए से ज्यादा होती है।