बीकानेर। अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश, बीकानेर सुश्री वन्दना ने स्टेट बनाम ईसरराम परताराम व अन्य के मामले में मुलजिमान ईसरराम व परता राम को बीकानेर के म्युजीयम सर्किल पर मुस्तगीस जगदीष पर चाकु व गुप्ती से प्राण घातक हमला करने के आरोप में उन पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 307 का जुर्म साबित मानते हुए मुल्जिमानों को 7 वर्ष का कठोर कारावास एवम् 5000/- रूपये जुर्माना का दण्ड अधिरोपित किया, तथा सह-अभियुक्त महिराम के खिलाफ जुर्म साबित न होने पर उसे उन्मोचित किया। इस मामले में लोक अभियोजक वर्षा चाण्डक, सहायक लोक अभियोजक जयश्री कुण्डलिया तथा अभियोजन के वकील मनीष भार्गव की ओर से छ: गवाह पेश किये गये तथा बचाव पक्ष के वकील अपस्रा बोथरा एवं जितेन्द्र भोजक की ओर से एक गवाह को प्रस्तुत किया गया। यह निर्णय आज ब.ज.सि रामपुरिया जैन विधि महाविद्यालय के विधार्थियों के द्वारा मंचित मूटकोर्ट के अन्तर्गत फौजदारी मामले स्टेट बनाम ईसरराम परताराम व अन्य में सुनाया गया। मूटकोर्ट के द्वारा विधि विधार्थियों ने अतिथियों के समक्ष एक बारगी न्यायालय का माहौल पैदा कर दिया। मामले को जींवत रूप देने के लिए न्यायाधीश, वकील, गवाहों, स्टेनों, अभियुक्त, पुलिस, डॉक्टर, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तथा अन्य सभी न्यायिक कर्मचारीयों की भूमिका विधि विधार्थियों के द्वारा ही निभायी गयी। मूटकोर्ट में विषय विषेषज्ञ के रूप में मुख्य अतिथि एडवोकेट श्री मुमताज अली, बार एसोसीएसन के अध्यक्ष, बीकानेर ने पुरे मामले का अवलोकन करने के पश्चात् छात्रों को एवम् विधि व्याख्यातागणों को इस मूटकोर्ट के सफलता पूर्वक एवं शानदार मंचन पर बधाई दी एवम् कानून की पेचिदगियों की ओर छात्रों का ध्यान आकर्षित किया तथा कहा कि इस प्रकार के आयोजन निश्चित रूप से अधिवक्ता व्यवसाय को शुरू करने वाले विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करेंगे। उन्होंन कहा कि न्याय केवल दिया ही नहीं जाना चाहिए बल्कि उसका आभास भी होना चाहिए कि न्याय हुआ है। इस मूटकोर्ट के पर्यवेक्षक एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में राजकीय विधि महाविद्यालय के वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. भगवानाराम विश्नोई ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस तरह के आयोजन विधि विधार्थियों के हितार्थ आवश्यक है। ताकि विद्यार्थी अपना वकालात का पेशा आरम्भ करें तो उन्हें किसी तरह की हिचकिचाहट न रहें । उन्होंने कहा कि विधि के क्षेत्र में सैद्धान्तिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक ज्ञान आवश्यक है, जो कि इन मूट कोर्ट के माध्यम से विधार्थियों को मिलता है। डॉ. विश्नोई ने सम्पूर्ण मूट का बारिकी से निरीक्षण करते हुए मूट के सभी पात्रों को सराहा।मूटकोर्ट के प्रारम्भ में महाविद्यालय के व्याख्याता व मूट कोर्ट प्रभारी डॉ. रीतेश व्यास ने मूट कोर्ट के संक्षिप्त तथ्यों के बारे में सभी विद्यार्थियों व अतिथियों को जानकारी दी व मूट कोर्ट में भाग लेने वाले सभी पात्रों का परिचय करवाया। महाविद्यालय के व्याख्याता, डॉ. रीतेष. व्यास, एवं डॉ राकेष धवन के निर्देशन में मंचित इस मूट कोर्ट में जिला एवं सत्र न्यायधिष के रूप में वन्दना सारस्वत, प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के रूप में कोमल सारस्वत पेशकार के रूप में दिलीप सिंह, स्टेनो ताराचन्द, सहायक कर्मचारी के रूप में पुखराज पंचारिया, अभियुक्त के रूप में कपिल शर्मा, सह अभियुक्त के रूप में नैनाराम, लोक अभियोजक व सहायक लोक अभियोजक के रूप में क्रमश: वर्षा चाण्डक एवम् जयश्री कुण्डलिया अभियोजन पक्ष के वकील के रूप में मनीष भार्गव बचाव पक्ष के वकील की रूप में अपस्रा बोथरा एवं जितेन्द्र भोजक, थानाधिकारी के रूप में गंगासिंह राजपुरोहित डॉक्टर के रूप में मेघा दुजारी, गवाहों के रूप में, राजेष व्यास, विजय चुरा, गुलषन कौर, एवं मुस्तगीस जगदीश के रूप में हेमन्त व्यास ने अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की।
इससे पूर्व स्वागतीय उद्बोदधन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अनन्त जोषी ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इण्डिया के निर्देषानुसार विधि विधार्थियों के लिये इस प्रकार के मूटकोर्ट को पाठयक्रम में रखा गया है ताकि विधार्थी न्यायलाय की औपचारिक एवं तकनीकी प्रक्रिया से भलीभांती परीचित हो सके।
कार्यक्रम के अन्त में अतिथियों को डॉ. रीतेष व्यास द्वारा अतिथियों एवं आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम की याद को अक्षुण बनाए रखने के लिए महाविद्यालय परिवार के द्वारा एडवोकट श्री मुमताज अली को महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अनन्त जोषी एवं वरिष्ठ व्याख्याता श्री सुरेष जी भाटीया द्वारा डॉ. भगवानाराम विष्नोई को भारतीय संविधान की प्रस्तावना लिखित एक स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।कार्यक्रम में डॉ बाल मुकन्द व्यास, डॉ. शराफत अली, डॉ प्रीति कोचर, श्री श्याम नारायण रंगा, श्री मगन सोलंकी, एवं महाविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित थे।